April 5, 2026 6:42 am

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जापान में आज मध्यावधि संसदीय चुनाव, महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा

प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची जनादेश मजबूत करने की कोशिश में, विपक्ष ने चुनाव के समय पर उठाए सवाल
टोक्यो: जापान में आज मध्यावधि संसदीय चुनाव कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने जनादेश हासिल करने के लिए संसद भंग कर चुनाव कराने का फैसला लिया है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को होने वाले इन चुनावों से पहले बढ़ती महंगाई जापानी मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है, क्योंकि स्थिर सैलरी और लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
यह चुनाव प्रधानमंत्री ताकाइची के नेतृत्व वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) गठबंधन और विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस के बीच हो रहा है। महंगाई, खाने-पीने की चीजों की कीमतें और जीवनयापन की लागत पूरे देश में मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर रही हैं।

महंगाई बनाम आमदनी
अल जज़ीरा के मुताबिक, पिछले एक साल में जापानी परिवारों के लिए गुजारा करना और मुश्किल हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में महंगाई के हिसाब से एडजस्ट की गई मजदूरी में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो लगातार 11वां महीना है।
हालांकि कुल महंगाई 2 से 3 प्रतिशत के बीच बनी हुई है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज उछाल आया है। 2023 में खराब फसल के कारण चावल की कीमतों में करीब 68 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। कमजोर येन के चलते कॉफी और चॉकलेट जैसी इम्पोर्टेड वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता घट गई है।

वोटरों की चिंता
पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके के एक सर्वे के अनुसार, 45 प्रतिशत मतदाताओं ने कीमतों पर नियंत्रण को अपने वोट का सबसे अहम मुद्दा बताया। टोक्यो की सोफिया यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर कोइची नाकानो ने कहा, “आमदनी में खास बढ़ोतरी बिना कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे लोगों को लग रहा है कि बुनियादी जरूरतें भी पूरी करना कठिन हो गया है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जापान की तेजी से बूढ़ी होती आबादी, बढ़ते टैक्स और सोशल सिक्योरिटी योगदान ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

ताकाइची के वादे और आर्थिक पैकेज
जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने के चार महीने से भी कम समय में ताकाइची अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। उन्होंने अपने अभियान में महंगाई को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
ताकाइची ने वादा किया है कि दोबारा चुने जाने पर वे खाने-पीने की चीजों और बिना अल्कोहल वाले ड्रिंक्स पर 8 प्रतिशत उपभोग कर को दो साल के लिए निलंबित करेंगी। यह घोषणा 21.3 ट्रिलियन येन (लगभग 123 अरब डॉलर) के बड़े स्टिमुलस पैकेज के बाद आई है, जिसमें ऊर्जा सब्सिडी, कैश पेमेंट और फूड वाउचर शामिल हैं।

वित्तीय स्थिरता पर सवाल
हालांकि, इन आर्थिक प्रस्तावों ने जापान की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। जापान का डेट-टू-जीडीपी अनुपात लगभग 230 प्रतिशत है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है।
पिछले महीने टैक्स कटौती की घोषणा और संसद भंग होने के बाद विदेशी निवेशकों ने जापानी सरकारी बॉन्ड बेचे, जिससे बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई।

चुनावी अनुमान और विपक्ष की आपत्ति
क्योटो न्यूज के अनुसार, ओपिनियन पोल्स में सत्ताधारी गठबंधन की निर्णायक जीत के संकेत मिल रहे हैं। 465 सदस्यीय निचले सदन में LDP को 233 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त होंगी।
इसके उलट, विपक्षी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस को अपनी पहले की 167 सीटों की तुलना में नुकसान होने की आशंका है।
विपक्षी नेता योशिहिको नोडा ने संसद भंग होने के सिर्फ 16 दिन बाद चुनाव कराने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे “लोकतंत्र का अपमान” बताया और कहा कि इससे मतदाता भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच जापान की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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