June 15, 2026 2:10 pm

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PUNJAB: SC. कमीशन का नोटिस लेने से प्रताप सिंह बाजवा के घरेलू कर्मचारियों ने किया इनकार: जसवीर सिंह गढ़ी

चंडीगढ़, 10 फरवरी 2026: पंजाब राज्य अनुसूचित जातियां आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस को विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-8 और सेक्टर-39 के आवासों पर तैनात घरेलू कर्मचारियों ने लेने से इनकार कर दिया। यह जानकारी आज पंजाब राज्य अनुसूचित जातियां आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने पत्रकारों को दी।

 गढ़ी ने बताया कि कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. के खिलाफ कथित जातिसूचक टिप्पणी के मामले में आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रताप सिंह बाजवा को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस की तामील करवाने के लिए आयोग का कर्मचारी दो बार बाजवा के आवास पर गया, लेकिन दोनों ही बार नोटिस लेने से इनकार कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तरनतारन चुनाव के दौरान प्रताप सिंह बाजवा को नोटिस जारी किया गया था और अब 90 दिनों के भीतर दूसरी बार उन्हें एस.सी. कमीशन को नोटिस जारी करना पड़ा है। श्री गढ़ी ने आरोप लगाया कि प्रताप सिंह बाजवा के बयानों से उनकी जागीरदार और दलित विरोधी सोच उजागर होती है, जो कांग्रेस पार्टी के तथाकथित दलित विरोधी डी.एन.ए. को भी सामने लाती है।

एस.सी. आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग भी अपने बयानों के माध्यम से दलित विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन कर चुके हैं और आयोग जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई करेगा।

जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि हरभजन सिंह ई.टी.ओ. ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर एम.ए. और बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की, बच्चों को शिक्षा दी और बाद में पी.सी.एस. परीक्षा पास कर ई.टी.ओ. बने। उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह की उपलब्धियों पर दलित समाज ही नहीं बल्कि पूरा पंजाब गर्व करता है।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने इतिहास में हमेशा दलितों को केवल अपमानित किया है। श्री गढ़ी ने कहा कि बाबा साहिब डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान सभा में आने से रोकने के लिए कांग्रेस ने कई प्रयास किए। यहां तक कि जिस क्षेत्र से बाबा साहिब चुनाव जीतकर आए थे, वहां 58 प्रतिशत गैर-मुस्लिम आबादी होने के बावजूद उस क्षेत्र को पाकिस्तान को दे दिया गया, जबकि बंटवारे के नियमों के अनुसार वह क्षेत्र भारत में आना चाहिए था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साइमन कमीशन द्वारा दलितों को दिए जा रहे अधिकारों को समाप्त करवाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने हर संभव प्रयास किया। अंततः महात्मा गांधी द्वारा पूना जेल में किए गए मरण व्रत के कारण बाबा साहिब को दलितों के लिए निर्धारित दोहरे मताधिकार को छोड़ना पड़ा।

एस.सी. आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी यह दावा करती है कि उसने दलितों को अधिकार दिए, जबकि सच्चाई यह है कि दलितों को अधिकार बाबा साहिब डॉ. भीमराव अंबेडकर और भारतीय संविधान ने दिए हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि यदि प्रताप सिंह बाजवा को भारतीय संविधान में आस्था है, तो वे 11 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजे पंजाब राज्य अनुसूचित जातियां आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर नोटिस के संबंध में अपना स्पष्टीकरण दें।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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