आयुर्वेदिक उपचार से नशे की लत छुड़ाकर लौट रही है ज़िंदगी में मुस्कान
पंचकूला, 11 फरवरी। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला नशा मुक्ति अभियान में एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से संस्थान नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं और अन्य मरीजों को स्वस्थ जीवन की ओर लौटाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे न केवल मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, बल्कि उनके परिवारों को भी नई राहत मिल रही है।
एनआईए की नशा मुक्ति पहल के तहत वर्ष 2025 में 500 से अधिक लोगों ने नशे की लत छोड़ी और समाज की मुख्यधारा में वापसी की। वहीं, वर्ष 2026 के जनवरी माह में ही 50 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि आयुर्वेद पद्धति नशा मुक्ति के क्षेत्र में एक प्रभावी और स्थायी समाधान के रूप में सामने आ रही है।
संस्थान में नशा मुक्ति के लिए पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत शिरोधारा सहित विभिन्न आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियां अपनाई जा रही हैं। इन उपचारों से न केवल नशे की लालसा को नियंत्रित किया जा रहा है, बल्कि मानसिक तनाव, बेचैनी, अनिद्रा और अवसाद जैसी समस्याओं में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब पमनानी के मार्गदर्शन में संस्थान हरियाणा सरकार के नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने में निरंतर योगदान दे रहा है।
एनआईए में मुख्य रूप से शराब, अफीम, गांजा, भांग, चरस, तंबाकू, कोकीन और हेरोइन जैसे नशों के आदी मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। नशे का सेवन व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इससे स्मृति क्षीणता, अवसाद, उन्माद और भ्रम जैसी मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं, वहीं हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियां, लीवर डैमेज, कैंसर और एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
इन आयुर्वेदिक पद्धतियों से किया जा रहा उपचार
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में नशा रोगियों का उपचार विभिन्न आयुर्वेदिक पद्धतियों से किया जाता है। पंचकर्म की शिरोधारा पद्धति के माध्यम से मानसिक तनाव और बेचैनी को कम किया जाता है। नशे की लालसा पर नियंत्रण के साथ नींद, एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार होता है।
नस्यकर्म पद्धति मस्तिष्क और नाड़ियों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। अभ्यंग पद्धति में औषधीय तेलों से पूरे शरीर की मालिश की जाती है, जबकि स्वेदन पद्धति से शरीर को गर्माहट देकर पसीना निकाला जाता है, जिससे विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
नस्यकर्म पद्धति नशा छुड़वाने में कारगर : डॉ. सुनीता यादव
अगद तंत्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनीता यादव के अनुसार, संस्थान में आयुर्वेदिक औषधियों, पंचकर्म, ध्यान और मानसिक परामर्श के जरिए नशा छुड़वाया जा रहा है। नस्यकर्म पद्धति नशा मुक्ति में विशेष रूप से कारगर साबित हो रही है। इसके माध्यम से नशे के आदी व्यक्ति की बेचैनी, शारीरिक कमजोरी और मानसिक तनाव में कमी आती है।
उन्होंने बताया कि योग और संतुलित आहार व्यवस्था भी मरीजों को नशे से बाहर निकालने में सहायक सिद्ध हो रही है। संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में भर्ती मरीजों का उपचार किया जाता है, जिससे बेहतर और स्थायी परिणाम सामने आ रहे हैं।
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की यह पहल नशा मुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।











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