June 15, 2026 2:11 pm

June 15, 2026 2:11 pm

CHANDIGARH: MCM के विद्यार्थियों ने वर्ल्ड वेटलेंड डे पर किया शैक्षिक ट्रेक, बर्ड पार्क का भी किया भ्रमण

चंडीगढ़। वर्ल्ड वेटलेंड डे के उपलक्ष्य में मेहर चंद महाजन डीएवी महिला महाविद्यालय (एमसीएम) के जूलॉजी विभाग द्वारा महाविद्यालय के इको क्लब “परिवेश” के सहयोग से सुखना झील आरक्षित वन में शैक्षिक ट्रेक एवं चंडीगढ़ बर्ड पार्क का शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में आर्द्रभूमि (वेटलेंड) और वन्यजीव संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस कार्यक्रम के तहत बीएससी तृतीय वर्ष (मेडिकल) की 28 छात्राओं ने सुखना झील के किनारे मानव श्रृंखला बनाकर वेटलेंड एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े जागरूकता संदेश दिए। सुखना झील आरक्षित वन के शांत एवं प्राकृतिक वातावरण में की गई पैदल यात्रा ने छात्राओं को एक प्रभावी और गहन शिक्षण अनुभव प्रदान किया। दूरबीन की सहायता से उन्होंने आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का सूक्ष्म अवलोकन किया तथा इसके पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
भ्रमण के दौरान छात्राओं ने जल निकायों के आसपास कई पक्षी प्रजातियों को देखा, जिनमें पर्पल गैलिन्यूल, यूरेशियन मूरहेन, लिटिल एग्रेट, इंडियन पीफॉवल, रेड-वॉटल्ड लैपविंग और जंगल बैबलर प्रमुख रहीं। इन प्रजातियों की उपस्थिति ने आर्द्रभूमि को प्रवासी और देशी पक्षियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में रेखांकित किया।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि आर्द्रभूमियाँ जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय प्रक्रियाओं के नियमन तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। शैक्षिक भ्रमण का समापन चंडीगढ़ बर्ड पार्क के दौरे के साथ हुआ, जिसे केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा सुखना झील के पीछे नगर वन क्षेत्र में 6.5 एकड़ में विकसित किया गया है। इस बर्ड पार्क में दो छोटी और दो वॉक-इन एवियरी बनाई गई हैं, जिन्हें इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि पक्षियों को अनुकूल आवास, भोजन और सुरक्षित आश्रय मिल सके।
यहां छात्राओं ने मैकाऊ, कॉकाटू, अफ्रीकी ग्रे तोते, फिंच, मेलानिस्टिक तीतर, हंस, तोते, लवबर्ड और बत्तखों सहित अनेक देशी एवं विदेशी पक्षी प्रजातियों को करीब से देखा। भ्रमण के दौरान हुई संवादात्मक चर्चाओं से छात्राओं को पक्षियों के व्यवहार, उनके आवास और संरक्षण रणनीतियों की बेहतर समझ मिली।


कार्यवाहक प्रधानाचार्य नीना शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की अनुभवात्मक शिक्षण गतिविधियां न केवल विद्यार्थियों की पर्यावरणीय चेतना को सशक्त बनाती हैं, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करती हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

3 4 4 0 5 5
Total Users : 344055
Total views : 569426

शहर चुनें