June 15, 2026 2:38 pm

June 15, 2026 2:38 pm

सर्राफा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, सोना फिसला, चांदी ने मारी बाज़ी

मुंबई: फरवरी का यह सप्ताह सर्राफा बाजार के लिए काफी अस्थिर रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते सोने की कीमतों में 1.82% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह की शुरुआत में ऊंचे स्तर पर रहने वाला सोना, सप्ताह के अंत तक निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली का शिकार होता नजर आया।

हफ्ते भर सोने के क्या रहे भाव?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार,
सोमवार को 24 कैरेट सोना (10 ग्राम): ₹1,55,593
शुक्रवार को 24 कैरेट सोना (10 ग्राम): ₹1,52,765
इस तरह महज पांच कारोबारी दिनों में प्रति 10 ग्राम पर करीब ₹2,800 से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, निचले स्तरों से शुक्रवार को हल्की रिकवरी देखने को मिली और MCX पर सोना ₹1,56,200 के आसपास बंद हुआ।

चांदी ने दिखाई जबरदस्त मजबूती
जहां सोना दबाव में रहा, वहीं चांदी ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। शुक्रवार को MCX पर चांदी के मार्च वायदा में 3.62% की तेज़ी दर्ज की गई, जिससे इसका भाव बढ़कर ₹2,44,999 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), सोलर एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग चांदी की कीमतों को मजबूती दे रही है।

US CPI डेटा से बदला बाजार का रुख
बाजार की इस हलचल के पीछे अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़े अहम रहे। जनवरी 2026 में अमेरिका की CPI महंगाई दर 2.40% रही, जो बाजार के अनुमान 2.50% से कम है।
इससे उम्मीद जगी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इसी संकेत के चलते डॉलर पर दबाव बढ़ा और शुक्रवार शाम को सोने-चांदी की कीमतों में दोबारा उछाल देखा गया।
एक्सपर्ट की राय: निवेशकों को क्या करना चाहिए?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के अनुसार,
सोने के लिए ₹1,60,000 का स्तर बड़ी रुकावट (Resistance) है।
जब तक भाव ₹1,56,000 के ऊपर नहीं टिकता, तब तक इसमें गिरकर ₹1,51,000 तक आने की संभावना बनी रह सकती है।

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी अब 3 से 5 साल की लंबी तेजी (Bull Run) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और मजबूत वैश्विक मांग को देखते हुए सलाह दी जा रही है कि निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 10–15% हिस्सा कीमती धातुओं में जरूर रखें और बड़ी गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखें।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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