पंचकूला, सोनीपत और झज्जर के पुलिस कमिश्नरों को मिली है यह अधिकारिता
चंडीगढ़: हरियाणा में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था के बावजूद सभी पुलिस आयुक्तों को समान कानूनी शक्तियां प्राप्त नहीं हैं। प्रदेश के पांच जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, सोनीपत और झज्जर—में पुलिस कमिश्नरेट लागू है, लेकिन धारा 163 बी.एन.एस.एस. (पूर्ववत धारा 144 सी.आर.पी.सी.) के तहत शक्तियों का वितरण समान नहीं है।
प्रदेश में वर्तमान में 23 राजस्व (सामान्य) जिले और एक विशेष पुलिस जिला (डबवाली, सिरसा) हैं। जिन जिलों में पुलिस कमिश्नरेट है, वहां जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के स्थान पर न्यूनतम आईजी या एडीजीपी रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को पुलिस कमिश्नर के रूप में तैनात किया जाता है।
वर्तमान में गुरुग्राम में 1998 बैच के आईपीएस विकास अरोड़ा (एडीजीपी रैंक) पुलिस कमिश्नर हैं, जबकि फरीदाबाद में 2004 बैच के आईपीएस सतेन्द्र कुमार (आईजी रैंक) यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पंचकूला में 1999 बैच के आईपीएस सिबास कबिराज और झज्जर में 1999 बैच की आईपीएस डॉ. राजश्री सिंह (दोनों एडीजीपी रैंक) पुलिस कमिश्नर हैं। वहीं 1996 बैच की आईपीएस ममता सिंह (एडीजीपी) के पास सोनीपत पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार है।
कानूनी स्थिति क्या कहती है
Punjab and Haryana High Court के अधिवक्ता और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जिलाधीश, उपमंडलाधिकारी (SDM) या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट न्यूसेंस या आशंकित खतरे की स्थिति में आदेश जारी कर सकता है।
प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, पंचकूला, सोनीपत और झज्जर में पुलिस कमिश्नर को धारा 163 BNSS के अंतर्गत जिलाधीश की शक्तियां प्रदान की गई हैं। साथ ही, इनके अधीन तैनात डीसीपी और एसीपी को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां भी दी गई हैं। इसका अर्थ यह है कि इन तीन जिलों में धारा 163 के आदेश पुलिस कमिश्नर के साथ-साथ डीसीपी/एसीपी द्वारा भी जारी किए जा सकते हैं।
गुरुग्राम–फरीदाबाद क्यों पीछे?
हेमंत कुमार का तर्क है कि जब पंचकूला, सोनीपत और झज्जर के पुलिस कमिश्नरों को धारा 163 BNSS में जिलाधीश की शक्तियां दी जा सकती हैं, तो पिछले 17–18 वर्षों से पुलिस कमिश्नरेट वाले दोनों महानगर—गुरुग्राम और फरीदाबाद—के पुलिस कमिश्नरों को यह अधिकार क्यों नहीं दिया गया। इन दोनों जिलों में आज तक न तो जिलाधीश की शक्ति और न ही कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्ति पुलिस कमिश्नर को दी गई है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
वर्तमान में हरियाणा के 23 जिलों में से केवल पंचकूला, सोनीपत और झज्जर को छोड़कर शेष 20 जिलों में धारा 163 BNSS के आदेश जिला उपायुक्त (DC) या संबंधित SDM द्वारा जारी किए जाते हैं—जिसमें गुरुग्राम और फरीदाबाद भी शामिल हैं।
समाधान क्या हो?
हेमंत कुमार का कहना है कि हरियाणा पुलिस कानून, 2007 के अनुसार पुलिस कमिश्नरेट में जिलाधीश की शक्तियों का प्रयोग पुलिस कमिश्नर द्वारा किया जाना चाहिए। ऐसे में या तो गुरुग्राम और फरीदाबाद के पुलिस कमिश्नरों को भी पंचकूला, सोनीपत और झज्जर की तर्ज पर धारा 163 BNSS में जिलाधीश की शक्ति दी जाए, या फिर इन तीनों जिलों से यह शक्ति वापस लेकर पुनः जिला उपायुक्तों को सौंप दी जाए।
इस संबंध में हेमंत कुमार द्वारा बीते वर्षों में प्रदेश सरकार और गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव को कई बार लिखा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है।










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