पेपरलेस रजिस्ट्री के बाद एक सप्ताह में स्वतः होंगे इंतकाल, पोर्टल अपग्रेड की तैयारी तेज
चंडीगढ़। हरियाणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तेजी से हाईटेक होता जा रहा है। आमजन को राहत देने और सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए विभाग लगातार डिजिटल सुधार कर रहा है। पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद अब अगला बड़ा कदम स्वतः इंतकाल (म्युटेशन) की ओर बढ़ाया जा रहा है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो अगले एक से डेढ़ माह में यह सुविधा प्रदेशभर में लागू हो सकती है।
लंबित इंतकाल बने सबसे बड़ी बाधा
इस महत्वाकांक्षी योजना की राह में फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लंबित इंतकाल मामलों की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अभी करीब 1.45 लाख मामले लंबित हैं। सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र निपटारा किया जाए, ताकि स्वचालित इंतकाल प्रणाली को बिना अड़चन लागू किया जा सके।
प्रदेश में 22 जिले, 143 तहसील/उप-तहसील और 7104 गांव हैं। रविवार तक की स्थिति में 80,182 मामलों में ऑनलाइन विवरण दर्ज ही नहीं हो पाया, जबकि 65,221 मामले पटवारी-कानूनगो स्तर पर स्वीकृति के इंतजार में हैं। वहीं तहसीलदार स्तर पर 10 दिन से अधिक समय से 47,230 मामले लंबित हैं। कुल मिलाकर लंबित प्रकरणों की संख्या 1,45,403 तक पहुंच चुकी है।
फरीदाबाद में सबसे ज्यादा लंबित मामले
राजस्व विभाग के अनुसार कुछ जिलों में इंतकाल का बोझ अधिक है।
फरीदाबाद – 20,792
पलवल – 13,808
अंबाला – 12,366
पानीपत – 11,964
हिसार – 9,314
सोनीपत – 7,210
जींद – 6,047
अन्य जिलों में यह संख्या 5 हजार या उससे कम है।
जनवरी से तेज हुई निपटान प्रक्रिया
गौरतलब है कि जनवरी के पहले सप्ताह तक 2.43 लाख इंतकाल लंबित थे। इसके बाद विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया। हर शनिवार विशेष कैंप लगाकर अब तक 98 हजार से अधिक मामलों का निपटान किया जा चुका है, जिससे लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
क्या होता है इंतकाल?
इंतकाल को दाखिल-खारिज या नामांतरण भी कहा जाता है। यह वह प्रक्रिया है, जिसमें जमीन या संपत्ति के मालिक का नाम राजस्व रिकॉर्ड में बदला जाता है। जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत या उपहार के बाद पुराने मालिक के स्थान पर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।
यह प्रक्रिया इसलिए भी जरूरी है ताकि जमाबंदी जैसे सरकारी रिकॉर्ड अपडेट हों और संपत्तिकर व अन्य कर सही व्यक्ति से वसूले जा सकें। कानूनी तौर पर स्वामित्व साबित करने और भविष्य के विवादों से बचने के लिए भी इंतकाल अनिवार्य माना जाता है। आम तौर पर रजिस्ट्री के बाद पटवारी या तहसीलदार के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी होती है।
पोर्टल अपग्रेड से आएगी बड़ी राहत
भू-अभिलेख विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि अगले एक-डेढ़ माह में पेपरलेस रजिस्ट्री पोर्टल को और अपग्रेड किया जाएगा। अपग्रेड के बाद रजिस्ट्री होते ही सिस्टम अपने आप इंतकाल दर्ज कर देगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले सभी लंबित मामलों का निस्तारण प्राथमिकता पर किया जा रहा है।
यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो प्रदेश के लाखों जमीन मालिकों को दफ्तरों के चक्कर और महीनों के इंतजार से बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व सेवाओं में डिजिटल क्रांति को और गति मिलेगी।












Total Users : 291259
Total views : 493518