August 28, 2026 1:05 am

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हरियाणा की तहसीलों में म्यूटेशन का अंबार; 1.45 लाख इंतकाल पेंडिंग, पटवारी–तहसीलदारों की सुस्ती बनी बड़ी वजह

 

सरकार ने दिए डेढ़ महीने में निपटान के निर्देश
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा संपत्तियों की रजिस्ट्री को पेपरलेस बनाकर पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिशों के बावजूद ऑटो-म्यूटेशन (स्वतः इंतकाल) व्यवस्था अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की तहसीलों में करीब 1.45 लाख म्यूटेशन (इंतकाल) के मामले लंबित पड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि देरी की वजह तकनीकी खामियां नहीं, बल्कि पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार स्तर पर कामकाज की सुस्ती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों (DC) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों का डेढ़ महीने के भीतर निपटान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आगे चलकर ऑटो-म्यूटेशन की योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
पटवारी–कानूनगो स्तर पर अटके 65 हजार से ज्यादा मामले
प्रदेश के 22 जिलों में कुल 143 तहसील/उप-तहसील और 7104 गांव हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, पिछले सप्ताह तक 80,182 मामलों में ऑनलाइन डाटा ही दर्ज नहीं किया जा सका। वहीं, पटवारी और कानूनगो स्तर पर स्वीकृति के इंतजार में 65,221 मामले अभी भी पेंडिंग हैं।

जनवरी में थे 2.43 लाख पेंडिंग, विशेष कैंप से मिली राहत
इस वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह तक करीब 2.43 लाख इंतकाल लंबित थे। इसके बाद राजस्व विभाग ने जनवरी के हर शनिवार विशेष कैंप लगाकर कार्रवाई तेज की और 98 हजार से अधिक मामलों का निपटान किया। इसके बावजूद अब भी बड़ी संख्या में फाइलें अटकी हुई हैं।
क्या है म्यूटेशन (इंतकाल) और क्यों है जरूरी?
म्यूटेशन, जिसे इंतकाल, दाखिल-खारिज या नामांतरण भी कहा जाता है, वह प्रक्रिया है जिसके तहत राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में पुराने मालिक की जगह नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।
म्यूटेशन क्यों जरूरी है?
स्वामित्व का प्रमाण: कानूनी तौर पर मालिकाना हक साबित करने के लिए जरूरी।
विवाद से बचाव: भविष्य में संपत्ति से जुड़े विवादों से सुरक्षा।
राजस्व वसूली: संपत्तिकर और अन्य सरकारी करों की सही वसूली के लिए आवश्यक।
रजिस्ट्री के बाद भी क्यों अटक जाता है इंतकाल?
कानून के अनुसार रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन अनिवार्य है, लेकिन अभी भी इसे पूरा कराने के लिए लोगों को पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यहीं पर सबसे ज्यादा देरी और लापरवाही सामने आती है।

जल्द शुरू होगा ‘ऑटो-म्यूटेशन’ सिस्टम
भू-अभिलेख विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल ने संकेत दिए हैं कि अगले एक से डेढ़ महीने में पेपरलेस रजिस्ट्री पोर्टल को और अपग्रेड किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है—
“रजिस्ट्री होते ही इंतकाल अपने आप हो जाए। लेकिन इसके लिए पहले पुराने पेंडिंग मामलों का निपटारा जरूरी है। अपग्रेडेशन के बाद पोर्टल स्वतः म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी करेगा, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।”

हरियाणा में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था लागू होने से आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और तय समय-सीमा में लंबित मामलों का निपटान करना बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि सरकार का डेढ़ महीने का अल्टीमेटम कितना असरदार साबित होता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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