नई दिल्ली: भारत में गुरुवार को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का औपचारिक और भव्य उद्घाटन हुआ। इस ऐतिहासिक वैश्विक आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। समिट में दुनिया के 60 से अधिक देशों की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, टेक दिग्गज, शिक्षाविद और एआई विशेषज्ञ शामिल हैं। इस मंच पर AI गवर्नेंस, सॉवरेन टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल कोऑपरेशन और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक मंथन किया जा रहा है।
वैश्विक नेताओं और टेक दिग्गजों की मौजूदगी
समिट के उद्घाटन समारोह में कई वैश्विक हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला, गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, मेटा के चीफ AI ऑफिसर एलेक्जेंडर वांग और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई शामिल रहे।
इस समिट में कुल मिलाकर:
20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष
60 से अधिक मंत्री
100 से ज्यादा सरकारी प्रतिनिधि
500 से अधिक AI लीडर्स
150 से ज्यादा शिक्षाविद, शोधकर्ता और सैकड़ों एक्सपर्ट्स
शिरकत कर रहे हैं।
PM मोदी का ऐतिहासिक संबोधन: AI मानवता के लिए, मानवता द्वारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा,
“मैं आप सभी का दुनिया के सबसे ऐतिहासिक AI समिट में स्वागत करता हूं। भारत आज दुनिया के सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र है। यह ग्लोबल साउथ के लिए गर्व की बात है कि AI समिट भारत में हो रहा है।”
उन्होंने कहा कि AI केवल मशीनों को ही नहीं, बल्कि इंसानी क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने का माध्यम है। पहले तकनीक का असर दिखने में दशकों लगते थे, लेकिन आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर बेहद तेज़ और व्यापक हो गया है।
AI इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट
पीएम मोदी ने AI की तुलना ऐतिहासिक तकनीकी क्रांतियों से करते हुए कहा कि जिस तरह वायरलेस सिग्नल से दुनिया रियल-टाइम में जुड़ी, उसी तरह AI भी इंसानी इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है।
उन्होंने चेताया कि:
“असली सवाल यह नहीं है कि AI भविष्य में क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि हम आज AI के साथ क्या करते हैं।”
AI को लोकतांत्रिक बनाने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि AI के लिए इंसान केवल डेटा पॉइंट न बन जाए, इसके लिए AI का डेमोक्रेटाइजेशन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि AI:
इनक्लूजन और एम्पावरमेंट का माध्यम बने
खासतौर पर ग्लोबल साउथ के लिए अवसर पैदा करे
GPS की तरह दिशा दिखाए, लेकिन नियंत्रण इंसानों के हाथ में रहे
PM मोदी का MANAV विज़न: AI के लिए मानव-केंद्रित फ्रेमवर्क
नई दिल्ली AI इम्पैक्ट समिट में पीएम मोदी ने MANAV विज़न पेश किया, जो AI की वैश्विक दिशा तय करने का भारत का रोडमैप है:
M – Moral & Ethical: नैतिक मूल्यों पर आधारित AI
A – Accountable Governance: पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी
N – National Sovereignty: जिसका डेटा, उसका अधिकार
A – Accessible & Inclusive: AI मोनोपॉली नहीं, मल्टीप्लायर बने
V – Valid & Verifiable: AI कानूनी और सत्यापन योग्य हो
पीएम मोदी ने कहा कि यह विज़न 21वीं सदी की AI-आधारित दुनिया में मानवता की भलाई का आधार बनेगा।
डीपफेक और फेक कंटेंट पर सख्त चेतावनी
प्रधानमंत्री ने डीपफेक और बनावटी कंटेंट को खुले समाज के लिए खतरा बताते हुए कहा कि:
AI जनरेटेड कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल जरूरी
टेक्स्ट, इमेज और वीडियो में वॉटरमार्किंग और क्लियर-सोर्स स्टैंडर्ड अपनाने होंगे
बच्चों की सुरक्षा के लिए AI स्पेस को फैमिली-फ्रेंडली बनाना होगा
भारत का AI इन्फ्रास्ट्रक्चर: कंप्यूट को पब्लिक गुड
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत AI को पब्लिक गुड मानता है।
उन्होंने बताया कि:
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 38,000 GPUs का सस्ता एक्सेस
जल्द ही इसमें 20,000 GPUs और जोड़े जाएंगे
स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और स्टूडेंट्स को सीधा फायदा मिलेगा
मैक्रों का भारत मॉडल की तारीफ
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की सराहना करते हुए कहा कि:
1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल पहचान
हर महीने 20 बिलियन ट्रांजैक्शन वाला पेमेंट सिस्टम
500 मिलियन डिजिटल हेल्थ ID
उन्होंने इसे इंडिया स्टैक – ओपन, इंटरऑपरेबल और सॉवरेन मॉडल बताया और कहा कि यही इस AI समिट की आत्मा है।
AI के भविष्य पर भारत की मजबूत छाप
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने साफ कर दिया है कि भारत केवल AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि AI के वैश्विक नियम, नैतिकता और दिशा तय करने वाला अग्रणी देश बनने की ओर बढ़ चुका है।
PM मोदी का संदेश स्पष्ट है — AI इंसानों का, इंसानों द्वारा और इंसानों के लिए होना चाहिए।











Total Users : 291318
Total views : 493612