लुधियाना, 20 फरवरी 2026। ऐतिहासिक किला रायपुर की धरती पर आयोजित ग्रामीण ओलंपिक खेलों में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खेलों को नशे के खिलाफ सबसे घातक हथियार बताते हुए राज्य के आगामी बजट में खेल बजट बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब बच्चे मैदान में पसीना बहाकर पदक जीतेंगे तो किसी भी नशा-विरोधी अभियान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली सरकारों के दौरान बंद की गई बैलगाड़ी दौड़ को उनकी सरकार ने कानून में संशोधन कर फिर से शुरू किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक खेल की बहाली नहीं, बल्कि पंजाब की ग्रामीण विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता का पुनर्जीवन है।
बैलगाड़ी दौड़ की वापसी: 13 साल बाद फिर गूंजी परंपरा की गर्जना
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैलगाड़ी दौड़ पर लगी रोक से ग्रामीण खेल प्रेमियों को गहरा आघात पहुंचा था। इस ऐतिहासिक खेल को दोबारा शुरू करने के लिए पंजाब विधानसभा ने 11 जुलाई 2025 को ‘पशु क्रूरता निवारण (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025’ सर्वसम्मति से पारित किया। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को लुधियाना के महमा सिंह वाला गांव में पारंपरिक खेलों का भव्य आयोजन हुआ और बैलगाड़ी दौड़ की औपचारिक वापसी हुई।
उन्होंने कहा, “लोग अपने बैलों को बेटों की तरह पालते हैं। यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और ग्रामीण संस्कृति का उत्सव है।”
किला रायपुर के ग्रेवाल स्टेडियम में लगातार तीसरे वर्ष ग्रामीण ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और इस बार का मुख्य आकर्षण 13 वर्षों बाद पुनः शुरू हुई बैलगाड़ी दौड़ रही।

नई खेल नीति 2023: हर गांव में स्टेडियम, खेलों को नई दिशा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने नई खेल नीति 2023 लागू कर पंजाब की खेल प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इस नीति के तहत हर गांव में स्टेडियम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार “खेदान वतन पंजाब दियां” के तीन सफल सत्र आयोजित कर चुकी है, जिनमें एक ही परिवार की तीन-तीन पीढ़ियां भाग लेती नजर आईं। यह दर्शाता है कि खेल अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जहां पिछली सरकारों ने इस क्षेत्र की उपेक्षा की, वहीं हमारी सरकार युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए खेलों को प्राथमिकता दे रही है।”
खेल और नशामुक्त पंजाब का विजन
राज्य में नशे की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने ‘युद्ध नशीएं विरुद्ध’ अभियान शुरू किया है और खेल इस लड़ाई में सबसे प्रभावी हथियार हैं।
उन्होंने कहा, “अगर युवा सुबह मैदान में अभ्यास करेंगे, प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे और पदक जीतेंगे, तो वे नशे की तरफ कभी नहीं जाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी बजट में खेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी, जिससे खेल अवसंरचना, कोचिंग, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं को और मजबूत किया जा सके।
किला रायपुर: ग्रामीण गौरव का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने किला रायपुर खेलों को पंजाब के ग्रामीण गौरव और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 1933 में सरदार इंदर सिंह के संरक्षण में ग्रेवाल शिक्षा समिति और ग्रेवाल खेल संघ के गठन के साथ इस स्टेडियम का सपना देखा गया था।
1933 में यहां पहली कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित हुई, 1942 में रथ दौड़ शुरू हुई, और 1950 में रथों से छतरियां हटाकर इसे बैलगाड़ी दौड़ का रूप दिया गया।
1964 में यहां लड़कियों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता शुरू हुई, जिससे यह लड़कियों की एथलेटिक्स को बढ़ावा देने वाला पहला ग्रामीण स्टेडियम बना।
आज ये खेल “मिनी ओलंपिक” या “ग्रामीण ओलंपिक” के नाम से लोकप्रिय हैं और अतीत में भारत के राष्ट्रपति भी इनमें शिरकत कर चुके हैं।
खेल इतिहास के दिग्गजों की धरती
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक मैदान पर देश के महान खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
इनमें हॉकी के जादूगर ध्यान चंद, महान खिलाड़ी बलबीर सिंह, उधम सिंह, अजीतपाल सिंह और सुरजीत सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
एथलेटिक्स में “फ्लाइंग सिख” मिल्खा सिंह, गुरबचन सिंह रंधावा और परवीन कुमार जैसे दिग्गजों ने भी इस ट्रैक पर दौड़ लगाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परंपरा आज भी युवाओं को प्रेरित कर रही है।
विकास कार्यों की झड़ी: गांव को मिलेगी नई पहचान
ग्रामीणों की मांगों को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं की घोषणा की:
1.5 करोड़ रुपये से गांव की गोलाकार सड़क चौड़ी की जाएगी।
ग्राम सहकारी समिति को पुनर्जीवित किया जाएगा।
95 लाख रुपये से आठ एकड़ के तालाब का सीचेवाल मॉडल पर सौंदर्यीकरण होगा।
10 लाख रुपये से ग्राम पुस्तकालय का उन्नयन किया जाएगा।
2 करोड़ रुपये से छह खिलाड़ियों की हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान बनेगा।
देहलों से पाखोवाल तक की सड़क का 30 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार होगा।
स्टेडियम में फ्लडलाइट्स लगाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विकास केवल आधारभूत ढांचा नहीं, बल्कि गांव की पहचान को नई ऊंचाई देगा।
आधुनिक पुस्तकालय और तालाब का सौंदर्यीकरण
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि किला रायपुर में आठ एकड़ के तालाब का व्यापक सौंदर्यीकरण किया जाएगा और वहां एक आधुनिक पुस्तकालय का निर्माण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय युवाओं के लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं तथा खेल प्रशिक्षण से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराएगा।
जनता का पैसा जनता के लिए
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम पिछली सरकारों द्वारा छोड़ी गई खामियों को दूर कर रहे हैं, जनता का पैसा बचा रहे हैं और उसे जनता पर खर्च कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने संसाधनों का सही उपयोग नहीं किया, जबकि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रही है।
सेहत योजना: 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज
मुख्यमंत्री ने लोगों से मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजीकरण कराने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लगभग 65 लाख परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं और यह राज्य का सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम है।
हलवारा हवाई अड्डे का नामकरण: शहीदों को सम्मान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर हलवारा हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि 19 वर्ष की आयु में देश के लिए बलिदान देने वाले इस महान क्रांतिकारी को यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
एकता और सद्भाव का संदेश
मुख्यमंत्री ने किला रायपुर के निवासियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर खेलों की इस विरासत को जीवित रखा है। उन्होंने सभी गांवों से आग्रह किया कि वे विकास और सामाजिक समरसता के लिए एकजुट होकर कार्य करें।
कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया, कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियन और तरुणप्रीत सिंह सोंड सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
खेलों से बदलेगा पंजाब का भविष्य
किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक 2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक चेतना, ग्रामीण आत्मसम्मान और नशामुक्त भविष्य का संकल्प बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार खेलों को केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मानती है। बैलगाड़ी दौड़ की वापसी, नई खेल नीति, गांव-गांव स्टेडियम और बढ़ते खेल बजट की घोषणाएं इस दिशा में बड़े कदम हैं।
पंजाब की धरती पर जब खेलों की धुन गूंजती है, तब यह केवल पदकों की कहानी नहीं होती, बल्कि एक ऐसे राज्य की कहानी होती है जो अपनी परंपरा, संस्कृति और युवाओं के भविष्य को एक साथ संवारने का संकल्प ले चुका है।











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