चंडीगढ़ | कालेज का समय ज़िंदगी के सबसे खास और यादगार पलों में से एक होता है। हर दिन नए अनुभव, नए अहसास और नई सीख लेकर आता है। इसलिए कालेज में रहते हुए न सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना ज़रूरी है, बल्कि उन पलों को भी संजोना चाहिए, जो आगे चलकर मुस्कान की वजह बनें। यह मानना है चंडीगढ़ के एसएसपी सिक्योरिटी एंड ट्रैफिक सुमेर प्रताप सिंह का।
सेक्टर-10 स्थित डीएवी कालेज, चंडीगढ़ से पढ़ाई कर चुके सुमेर प्रताप सिंह ने अपने कालेज के दिनों को याद करते हुए कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2000 में बी.कॉम में दाखिला लिया था। उस दौर में मोबाइल फोन का चलन अभी शुरू ही हुआ था। कालेज आने-जाने के लिए वह रोज़ बाइक से जाते थे और मौका मिलने पर दोस्तों के साथ गेड़ी रूट का भी रुख कर लेते थे।
सुमेर प्रताप सिंह का मानना है कि हर व्यक्ति का नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ कालेज लाइफ की सुनहरी यादें बनाना भी उतना ही जरूरी है। मस्ती भरे पल, दोस्ती और छोटे-छोटे अनुभव ही आगे चलकर ज़िंदगी को खास बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ज़िंदगी के हर पड़ाव का अपना महत्व होता है, और कालेज का दौर उसकी मजबूत नींव है।
यूथ फेस्टिवल की अलग ही रौनक
यूथ फेस्टिवल के अनुभव साझा करते हुए एसएसपी सुमेर प्रताप सिंह ने बताया कि उस समय कालेज में कार्यक्रमों की अलग ही रौनक होती थी। हालांकि वे मंच पर प्रस्तुति देने वालों में शामिल नहीं थे, लेकिन दर्शक बनकर प्रतिभागियों को प्रोत्साहित जरूर करते थे। उनका कहना है कि कला को देखने और सराहने वालों की भूमिका भी उतनी ही अहम होती है, जितनी मंच पर प्रदर्शन करने वालों की।
पासआउट के बाद कैंटीन से जुड़ी याद
कालेज से पासआउट होने के बाद वे सिर्फ एक बार ही दोबारा कालेज पहुंचे। उस दौरान वह कैंटीन गए, जहां पढ़ाई के दिनों की कई यादें ताजा हो गईं। हालांकि यह दौरा यादों को ताजा करने से ज्यादा काम के सिलसिले में था, लेकिन उन्होंने माना कि कालेज में समय के साथ कुछ बदलाव जरूर देखने को मिले।
कुल मिलाकर, एसएसपी सुमेर प्रताप सिंह का संदेश साफ है—कालेज लाइफ सिर्फ डिग्री हासिल करने का समय नहीं, बल्कि ऐसी यादें बनाने का दौर है जो पूरी ज़िंदगी साथ रहती हैं।













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