April 6, 2026 1:35 pm

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HARYANA: लाखन माजरा स्पोर्ट्स नर्सरी हादसा: आयोग सख्त, उच्च स्तरीय जांच के आदेश

नाबालिग खिलाड़ी हार्दिक की मौत पर जस्टिस ललित बत्रा की कड़ी टिप्पणी, मुआवजा नीति बनाने के निर्देश
चंडीगढ़, 22 फरवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने रोहतक जिले के गांव लाखन माजरा स्थित स्पोर्ट्स नर्सरी में बास्केटबॉल पोल गिरने से राष्ट्रीय स्तर के उभरते नाबालिग खिलाड़ी हार्दिक की मौत के मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह घटना मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का संकेत देती है, विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, सुरक्षा और गरिमा के अधिकार का।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सार्वजनिक धन से निर्मित खेल सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तो यह राज्य के संवैधानिक दायित्वों की सीधी अनदेखी है।
रिपोर्ट में नहीं मिले ठोस जवाब
आयोग द्वारा 18 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश के अनुपालन में उपायुक्त, रोहतक की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में घटना के वास्तविक कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने संबंधी कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं पाया गया। रिपोर्ट में केवल यह उल्लेख था कि बास्केटबॉल स्टेडियम निर्माण के लिए MPLADS पोर्टल से ₹17,80,294 की राशि स्वीकृत हुई थी।
आयोग ने यह भी पाया कि 26 नवंबर 2025 को गठित जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। साथ ही खेल उपकरणों और ढांचे की सुरक्षा जांच, नियमित निरीक्षण, संरचनात्मक स्थिरता परीक्षण और मुआवजा देने की मानक प्रक्रिया (SOP) को लेकर भी कोई ठोस व्यवस्था सामने नहीं आई।
“जंग लगा पोल और चेतावनियों की अनदेखी गंभीर चूक”
अध्यक्ष जस्टिस बत्रा ने कहा कि यदि बास्केटबॉल पोल जंग लगा और खतरनाक स्थिति में था तथा बार-बार चेतावनियों के बावजूद उसकी मरम्मत या बदलाव नहीं किया गया, तो यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही और वैधानिक कर्तव्य में गंभीर चूक है। ऐसी निष्क्रियता, जिसके परिणामस्वरूप एक युवा खिलाड़ी की जान गई, अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा खेलों के क्षेत्र में अग्रणी राज्य रहा है और खेल अवसंरचना पर भारी सार्वजनिक धन व्यय किया जाता है। ऐसे में गुणवत्ता नियंत्रण, नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आयोग के प्रमुख निर्देश
आयोग ने व्यापक जनहित में निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं—
प्रधान सचिव, खेल विभाग, हरियाणा को उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश।
समिति घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करेगी।
स्वीकृत डिजाइन, गुणवत्ता मानकों और रखरखाव प्रोटोकॉल के पालन की जांच होगी।
राज्य की सभी स्पोर्ट्स नर्सरियों और सरकारी खेल सुविधाओं का संरचनात्मक स्थिरता व सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा।
नियमित निरीक्षण और तृतीय-पक्ष संरचनात्मक प्रमाणन के लिए समान तंत्र विकसित किया जाएगा।
मृतक खिलाड़ी के परिवार को भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त मुआवजा देने की सिफारिश।
खेल सुविधाओं में मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में त्वरित अंतरिम राहत और अंतिम मुआवजा देने हेतु समयबद्ध SOP तैयार करने के निर्देश।
उच्च स्तरीय समिति में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (अध्यक्ष), महानिदेशक खेल एवं युवा मामले विभाग, वरिष्ठ संरचनात्मक अभियंता और एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी/अर्जुन पुरस्कार विजेता को सदस्य बनाने की अनुशंसा।
19 मई 2026 को अगली सुनवाई
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि प्रधान सचिव, खेल विभाग को निर्देशित किया गया है कि जांच समिति की रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए। साथ ही महानिदेशक, खेल एवं युवा मामले विभाग, हरियाणा, पंचकूला को भी लंबित विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र भेजने के आदेश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई पूर्ण आयोग के समक्ष 19 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत दुर्घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक खेल अवसंरचना की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और बच्चों एवं खिलाड़ियों के जीवन के अधिकार से जुड़ा व्यापक जनहित का प्रश्न है। आयोग ने उम्मीद जताई है कि संबंधित विभाग त्वरित कार्रवाई कर दोषियों की जवाबदेही तय करेंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

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Author: BabuGiri Hindi

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