व्यापार समझौते और मनरेगा को खत्म करने के विरोध में रैली: वड़िंग
कहा: पंजाब के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है व्यापार समझौता
चंडीगढ़, 22 फरवरी: पंजाब कांग्रेस द्वारा 28 फरवरी को बरनाला में एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल होंगे।
इस संबंध में आज यहां जानकारी देते, हुए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बताया कि यह रैली मनरेगा को समाप्त करने और अमेरिका के साथ किए जा रहे व्यापार समझौते के विरोध में आयोजित की जा रही है, जिसका पंजाब पर गंभीर और विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।
इस बारे में पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जहां मनरेगा से संबंधित नया कानून गरीबों की रोज़ी-रोटी पर गहरा असर डालेगा। वहीं पर, अमेरिका के साथ व्यापार समझौता पंजाब के किसानों को तबाह कर देगा। उन्होंने कहा कि कृषि पंजाब की अर्थव्यवस्था का आधार है, इसलिए यह राज्य सबसे अधिक प्रभावित होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह व्यापार समझौता लंबे समय में कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। यदि कृषि उत्पादों को ‘शून्य प्रतिशत’ टैरिफ पर आयात करने की अनुमति दी गई, तो स्थानीय कृषि व्यवस्था नष्ट हो सकती है। इससे किसानों के पास न तो काम रहेगा और न ही आय, और राज्य में बड़ी संख्या में किसान बेरोज़गार हो जाएंगे।
वड़िंग ने जोर देते हुए, कहा कि ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस तरह के हालातों का फायदा दुश्मन ताकतें उठा सकती हैं, जो लगातार राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा पहले ही पाकिस्तान से तस्करी होकर आ रहे नशे का शिकार हो रहे हैं और राज्य किसी अन्य खतरे का जोखिम नहीं उठा सकता।
इस दौरान कांग्रेस से निष्कासित नेत्री नवजोत कौर सिद्धू द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए, वड़िंग ने कहा कि इनकी मानसिक और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए, वह इनके बयानों पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझते हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केवल श्रीमती सिद्धू ही नहीं हैं, जो उन्हें निराधार आरोपों और आलोचनाओं के जरिए निशाना बना रही हैं। बल्कि मुख्यमंत्री भगवंत मान, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, उनके रिश्तेदार बिक्रम मजीठिया और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ भी ऐसे ही आरोप लगा रहे हैं, क्योंकि ये सभी नेता अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए कांग्रेस को एकमात्र और साझा खतरा मान रहे हैं।











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