रमेश गोयत
चंडीगढ़, 28 फरवरी: पंजाब में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में ‘खेल पिटारा’ नामक खेल-आधारित शिक्षण किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल से 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 7.5 लाख बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार इस योजना पर करीब 9.3 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, जिसे भविष्य की पीढ़ी में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
3-8 वर्ष के बच्चों पर फोकस, मजबूत होगी सीखने की नींव
यह पहल नर्सरी से दूसरी कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए है। सरकार का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर ही सीखने की मजबूत नींव तैयार करना है, ताकि बच्चों में आगे चलकर आत्मविश्वास, बौद्धिक क्षमता और शैक्षणिक सफलता सुनिश्चित की जा सके।
कक्षाओं को रटने की परंपरागत पद्धति से हटाकर खेल, गतिविधियों और सहभागिता पर आधारित बनाया जाएगा। समस्त शिक्षण सामग्री पंजाबी भाषा में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को सहज और बेहतर समझ मिल सके।
क्या है ‘खेल पिटारा’?
‘खेल पिटारा’ 3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिए तैयार की गई एक व्यापक लर्निंग-टीचिंग मटेरियल किट है। इसका उद्देश्य बच्चों को रटने की बजाय अनुभवात्मक और आनंददायक तरीके से सीखने के लिए प्रेरित करना है।
इसमें शामिल हैं:
आयु-आधारित खिलौने और मैनिपुलेटिव्स
पहेलियाँ और शैक्षणिक खेल
स्टोरी कार्ड और फ्लैश कार्ड
पोस्टर और गतिविधि पुस्तिकाएँ
कठपुतलियाँ और अन्य खेल सामग्री
शिक्षकों के लिए विशेष संसाधन सामग्री
यह किट भाषा विकास, गणितीय समझ, रचनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और सामाजिक-भावनात्मक विकास को बढ़ावा देगी।
12,856 स्कूलों में होगा वितरण
राज्य के लगभग 12,856 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में यह किट वितरित की जाएगी। खरीद प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वितरण अंतिम चरण में है। सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि 1 अप्रैल तक सभी स्कूलों में ‘खेल पिटारा’ पहुंचा दिया जाए।
फाउंडेशनल स्टेज की कक्षाएं संभालने वाले शिक्षकों को भी गतिविधि-आधारित शिक्षण के लिए विशेष सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
शिक्षा मंत्री का बयान
पंजाब के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने कहा कि शिक्षा में वास्तविक परिवर्तन प्रारंभिक स्तर से ही शुरू होता है। उन्होंने कहा, “3 से 8 वर्ष के बच्चों में निवेश करना अगले 20 वर्षों के लिए पंजाब के भविष्य में निवेश करने जैसा है। ‘खेल पिटारा’ के माध्यम से बच्चे स्कूल को बोझ नहीं, बल्कि खोज और रचनात्मकता के मंच के रूप में अनुभव करेंगे।”
रटने से गतिविधि-आधारित शिक्षा की ओर
सरकार का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में सीखने की खाई को समाप्त कर दिया जाए तो भविष्य में शैक्षणिक चुनौतियों को कम किया जा सकता है।
‘खेल पिटारा’ पहल के माध्यम से भगवंत मान सरकार न केवल पाठ्यक्रम में सुधार कर रही है, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत बनाकर पंजाब के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास भी कर रही है।










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