June 15, 2026 5:03 pm

June 15, 2026 5:03 pm

विवाह के बदलते रूप

डॉ. विजय गर्ग
समाज में समय के साथ कई रीति-रिवाजों और परंपराओं में बदलाव आते रहते हैं। विवाह भी एक ऐसा संस्कार है जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है। लेकिन आधुनिक युग में विवाह का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।

पुराने समय की शादी
पहले विवाह सादगी, रीति-रिवाज और पारिवारिक परम्पराओं पर आधारित होते थे। गांवों में सभी लोग मिलकर तैयारी करते थे। घर का खाना, रिश्तेदारों की सहभागिता और सादगी भरे आयोजन विवाह के विशेष व्यंजन होते थे। विवाह सामाजिक एकता और प्रेम का प्रतीक होता था।

आधुनिक विवाह की चमक-धमक
आजकल शादी एक बड़ी समारोह की तरह बन गई है। महंगे बैंक्वेट हॉल, डेस्टिनेशन वेडिंग, थीम सजावट, डीजे और फैशन शो जैसे तत्व विवाह को अनोखा बनाते हैं। सोशल मीडिया के प्रभाव से लोग शादियों को शानदार बनाने की दौड़ में लगे हुए हैं।

प्रौद्योगिकी का प्रभाव
डिजिटल न्योता, ऑनलाइन रिलेशनशिप सर्च प्लेटफॉर्म, लाइव स्ट्रीमिंग और ड्रोन फोटोग्राफी विवाह को नया रूप दे रहे हैं। विदेशों में रहने वाले रिश्तेदार भी लाइव प्रसारण के माध्यम से विवाह में शामिल हो सकते हैं।

खर्च और दिखावे की दौड़
विवाह में बढ़ती लागत मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए चिंता का विषय बन रही है। कई बार लोग सामाजिक दबावों के कारण अपनी क्षमता से अधिक खर्च कर लेते हैं, जिससे ऋण और आर्थिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।

बदलते सामाजिक मूल्य
आजकल लड़के-लड़की की शिक्षा, रोजगार और पारस्परिक समझ को अधिक महत्व दिया जा रहा है। अंतःप्रजनन और प्रेम विवाह की स्वीकृति भी बढ़ रही है। विवाह को अब केवल रीति-रिवाज ही नहीं बल्कि साझा जीवन का दायित्व और साझेदारी के रूप में देखा जाता है।

सादगी की ओर वापसी का आंदोलन
कुछ परिवार अब सादगीपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल विवाहों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लंगर प्रणाली, कम खर्च वाले आयोजन और सामाजिक सेवा से जुड़े विवाह एक सकारात्मक प्रवृत्ति दर्शाते हैं।
उत्कृष्ट
विवाह का स्वरूप बदलना सामाजिक विकास का स्वाभाविक हिस्सा है। जहां आधुनिकता सुविधा और रंग लाती है, वहीं सादगी, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को भी बनाए रखना आवश्यक है। संतुलित और सार्थक विवाह ही एक खुशहाल परिवार और मजबूत समाज की नींव रख सकते हैं। डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

3 4 4 1 2 3
Total Users : 344123
Total views : 569511

शहर चुनें