– डीएलसीसुपवा के छात्रों ने बनाई है डॉक्यूमेंट्री फिल्म
– राजस्थान की प्राचीन लोक वाद्य परंपरा से परिचय कराती है ‘रावण हत्था’
रोहतक, 1 मार्च 2026।
दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) के छात्रों द्वारा बनाई डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘रावण हत्था’ का पोस्टर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने जयपुर में लॉन्च किया। ‘रावण हत्था’ राजस्थान की प्राचीन लोक वाद्य परंपरा को लोगों के बीच फिर से जीवंत करती है। इसके डायरेक्टर एवं सुपवा के छात्र अरविंद चौधरी ने अपने कुलगुरु डॉ अमित आर्य व अन्य स्टाफ से मिलकर आशीर्वाद लिया।
‘रावण हत्था’ की पोस्टर लॉन्चिंग जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र में संस्कार भारती द्वारा आयोजित ‘लोक कला संगम’ कार्यक्रम के समापन सत्र में हुई, जहां उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि रहीं। डीएलसीसुपवा के एफटीवी डिपार्टमेंट के 2018 बैच के छात्र अरविंद चौधरी ने बताया कि राजस्थान की लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से इस डॉक्यूमेंट्री को संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर द्वारा बनवाया गया है। इसके लिए शोध एवं निर्देशन स्वयं अरविंद ने किया, जबकि छायांकन रिदम तंवर, संपादन यश चोपड़ा, ध्वनि सज्जा तन्मय भुटानी, सह संपादक दिनेश कुमार, ध्वनि मुद्रक मोहित वत्स रहे। ये सभी डीएलसीसुपवा के ही छात्र हैं।
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने डॉक्यूमेंट्री फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे छात्र निश्चित तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में अच्छा कार्य कर रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा सुपवा के छात्रों को डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रोजेक्ट देना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उन्हें यहां के छात्रों के काम पर पूरा भरोसा है। निश्चित तौर पर अन्य छात्रों का भी ऐसे उत्साहवर्धन से मनोबल बढ़ेगा और ये आगे चलकर बॉलीवुड व हॉलीवुड में भी अपने सुपवा परिवार, प्रदेश व देश का नाम रोशन करेंगे। इस दौरान रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा, एफटीवी के एफसी महेश टीपी, डीन अकेडमिक डॉ अजय कौशिक आदि भी मौजूद रहे।
विलुप्त होती विरासत को सहेजने का प्रयास
सुपवा के छात्र एवं निर्देशक अरविंद चौधरी ने बताया कि ‘रावण हत्था’ राजस्थान का अत्यंत प्राचीन लोक वाद्ययंत्र है, जिसे विशेष रूप से भोपा समाज के कलाकार बनाते और साधना के साथ बजाते हैं। यह वाद्य न केवल संगीत का माध्यम है, बल्कि लोक आस्था, परंपरा और इतिहास का जीवंत प्रतीक भी है। फिल्म का निर्माण लोक कला संस्कृति को विलुप्त होने से बचाने व नई पीढ़ी में इसके प्रति जागरूकता और गौरव की भावना जागृत करने के उद्देश्य से किया गया है। चौधरी ने बताया कि अपनी टीम के साथ लगभग छह माह तक शोध कार्य किया और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर भोपा कलाकारों से संवाद स्थापित कर इस विरासत को कैमरे में सहेजा।











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