— सेंट्रल आइलैंड एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CIARI) और सोलर पार्क का किया भ्रमण
— 45 उच्च उपज वाली फसल किस्में विकसित, 25 हजार से अधिक किसान लाभान्वित
अनिल कुमार शर्मा
शिमला। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अध्ययन यात्रा पर गए हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों के दल ने अंतिम दिन पोर्ट ब्लेयर (अब श्री विजयपुरम) में कृषि अनुसंधान और सौर ऊर्जा परियोजनाओं का अवलोकन किया। यह भ्रमण पत्र सूचना कार्यालय (PIB) शिमला द्वारा आयोजित किया गया।
उष्णकटिबंधीय कृषि का अनोखा राष्ट्रीय संस्थान
पत्रकारों ने श्री विजयपुरम स्थित Central Island Agricultural Research Institute (CIARI) का दौरा किया। वर्ष 1978 में स्थापित यह देश का एकमात्र राष्ट्रीय संस्थान है, जो विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र पर केंद्रित है। यह संस्थान अंडमान-निकोबार में कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
संस्थान के निदेशक डॉ. जयसुंदर ने मीडिया दल को बताया कि CIARI अब तक 45 उच्च उपज वाली फसल किस्में विकसित कर चुका है। इनमें नारियल, चावल, दालें, नोनी, शकरकंद, पत्तेदार सब्जियां, बैंगन और मशरूम जैसी फसलें शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्र को समर्पित 148 नई फसल किस्मों में CIARI की 7 प्रमुख किस्में भी शामिल की गईं।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम बना मॉडल
डॉ. जयसुंदर ने जानकारी दी कि संस्थान ने छोटे द्वीपीय खेतों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम मॉडल विकसित किए हैं। नारियल आधारित प्लांटेशन में फसल, पशुधन, मत्स्य पालन और बागवानी को एकीकृत कर संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे अपशिष्ट पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिला है और बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम हुई है।
उन्होंने बताया कि संस्थान के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अब तक 25 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं। CIARI “विकसित भारत @2047” के विजन के तहत जीनोमिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, डिजिटल कृषि और जलवायु-स्मार्ट प्रणालियों पर विशेष फोकस कर रहा है। संस्थान अंडमान-निकोबार को उष्णकटिबंधीय द्वीप कृषि का वैश्विक मॉडल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सौर ऊर्जा से हरित द्वीप की ओर
पत्रकारों ने द्वीपों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी अवलोकन किया। सोलर पार्क में NLC India Limited के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर श्री पंडियाराजन ने बताया कि Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) के तहत संचालित सौर परियोजनाएं द्वीपों को हरित ऊर्जा की ओर ले जा रही हैं।
इन परियोजनाओं से महंगे डीज़ल ईंधन पर निर्भरता कम हो रही है और पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कई सौर ऊर्जा परियोजनाएं संचालित हैं तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।
अध्ययन भ्रमण के बाद हिमाचल प्रदेश का मीडिया दल वापिस लौट आया। इस यात्रा के दौरान पत्रकारों ने द्वीपों में कृषि नवाचार और हरित ऊर्जा पहलों को नजदीक से देखा और समझा।










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