चंडीगढ़। चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा सेक्टर-38सी स्थित रानी लक्ष्मी बाई भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित ‘हास्य-व्यंग्य गोष्ठी’ अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में शहर के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे सभागार साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम में कला परिषद चंडीगढ़ के वित्तीय सलाहकार निहाल चंद डोगरा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। गोष्ठी में प्रख्यात वक्ताओं डॉ. दलजीत कौर, प्रेम विज, डॉ. गुरमीत सिंह बेदी एवं सुभाष शर्मा ने अपनी व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सुभाष शर्मा ने अपनी व्यंग्य रचना ‘तुसी ता वेहले हो’ के माध्यम से एक रिटायर्ड व्यक्ति की दयनीय स्थिति पर चुटीला कटाक्ष प्रस्तुत किया। प्रेम विज ने ‘बिना बुखार के बुखार’ में आम आदमी की मानसिक स्थिति को हास्य के जरिए उजागर किया। डॉ. गुरमीत सिंह बेदी ने ‘मैं पति परमेश्वर हूं’ शीर्षक रचना के माध्यम से पति की वास्तविक स्थिति को गुदगुदाते अंदाज में प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. दलजीत कौर ने ‘मन ही मैला होय’ में मन के छिपे भावों पर तीखा व्यंग्य पढ़ा।
वक्ताओं ने समसामयिक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्यों पर स्वस्थ किंतु धारदार व्यंग्य के माध्यम से प्रकाश डाला। उनकी प्रस्तुतियों में हास्य के साथ गंभीर संदेश भी निहित था, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। तालियों की गूंज से पूरा सभागार गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के चेयरमैन डॉ. मनमोहन सिंह ने की। इस अवसर पर वाइस-चेयरमैन डॉ. अनीश गर्ग एवं सचिव सुभाष भास्कर विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि हास्य-व्यंग्य साहित्य समाज का दर्पण है, जो विसंगतियों को उजागर कर सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में डॉ. निर्मल सूद, डॉ. विनोद शर्मा, विमला गुगलानी, डॉ. ओशीन शर्मा, नीलम नारंग, संगीता शर्मा कुंद्रा, अमृत सोनी, आर.के. भगत, जयवीश मल्ही और दमन सिंह थिंड सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। गोष्ठी ने शहर के साहित्यिक परिवेश को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।











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