April 5, 2026 6:18 am

April 5, 2026 6:18 am

भंडारण के संकट से जूझते किसान

डॉ विजय गर्ग

भारत कृषि प्रधान देश है, परंतु विडंबना यह है कि अन्नदाता कहलाने वाले किसान आज भी अपनी उपज के सुरक्षित भंडारण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खेतों में पसीना बहाकर तैयार की गई फसल जब उचित भंडारण के अभाव में खराब हो जाती है, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि किसान की उम्मीदों पर भी चोट होती है।

समस्या की जड़

देश में अनाज उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके अनुपात में वैज्ञानिक और आधुनिक गोदामों की संख्या पर्याप्त नहीं है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी फसल को खुले में या अस्थायी टीन-शेड के नीचे रखने को मजबूर हैं। बारिश, नमी, कीट और चूहों से अनाज खराब हो जाता है। छोटे और सीमांत किसान, जिनकी संख्या अधिक है, निजी गोदाम किराए पर लेने में भी सक्षम नहीं होते।

कई बार सरकारी खरीद केंद्रों पर समय पर खरीद नहीं होती, जिससे किसानों को मजबूरी में फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है। इससे उनकी आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सरकारी प्रयास और सीमाएँ

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) देश में अनाज की खरीद और भंडारण का प्रमुख दायित्व निभाता है। इसके बावजूद, भंडारण क्षमता कई राज्यों में मांग से कम पड़ जाती है।

केंद्रीय गोदाम निगम (सीडब्ल्यूसी)और विभिन्न राज्य वेयरहाउसिंग निगम भी गोदाम उपलब्ध कराते हैं, परंतु ग्रामीण स्तर पर इनकी पहुँच सीमित है। हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक साइलो प्रणाली को बढ़ावा देने की पहल की गई है, लेकिन इसका लाभ अभी सभी किसानों तक नहीं पहुँच पाया है।

प्रभाव

1. आर्थिक हानि – फसल खराब होने से सीधे आय में कमी आती है।

2. कर्ज का दबाव – नुकसान की भरपाई के लिए किसान कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं।

3. बाजार में अस्थिरता – जब फसल अधिक मात्रा में एक साथ बिकती है, तो कीमतें गिर जाती हैं।

4. खाद्य सुरक्षा पर असर – खराब भंडारण से राष्ट्रीय स्तर पर भी अनाज की बर्बादी होती है।

समाधान की दिशा

ग्रामीण स्तर पर छोटे गोदाम: पंचायत स्तर पर सामुदायिक भंडारण केंद्र स्थापित किए जाएँ।

वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग: आधुनिक साइलो, कोल्ड स्टोरेज और नमी-रोधी तकनीक को बढ़ावा दिया जाए।

वेयरहाउस रसीद प्रणाली: किसान फसल को गोदाम में रखकर रसीद के आधार पर बैंक से ऋण ले सकें और उचित समय पर बेच सकें।

डिजिटल पारदर्शिता: खरीद और भंडारण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए।

 

किसान केवल उत्पादनकर्ता नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के संरक्षक हैं। यदि उन्हें उचित भंडारण सुविधा मिले, तो वे अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं और कृषि को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। भंडारण संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव है।

जब तक किसान की फसल सुरक्षित नहीं, तब तक उसकी मेहनत भी सुरक्षित नहीं। इसलिए समय की मांग है कि भंडारण व्यवस्था को सुदृढ़ कर किसान को आर्थिक और मानसिक राहत दी जाए

डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

2 9 0 9 8 2
Total Users : 290982
Total views : 493101

शहर चुनें