निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक साक्ष्यों पर उठे सवालों के बाद दिया फैसला
पंचकूला/चंडीगढ़। Punjab and Haryana High Court ने चर्चित पत्रकार हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए Gurmeet Ram Rahim Singh को बड़ी राहत दी है। अदालत ने पत्रकार Ramchandra Chhatrapati हत्याकांड में राम रहीम को बरी कर दिया, जबकि मामले में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है।
इस मामले में निचली अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
बैलिस्टिक साक्ष्यों पर उठे सवाल
अपील में बचाव पक्ष ने मुख्य रूप से बैलिस्टिक साक्ष्यों को चुनौती दी। बचाव पक्ष का तर्क था कि जिस गोली के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने दोष सिद्ध किया था, उसकी जांच और साक्ष्य प्रक्रिया में कई तकनीकी खामियां हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वारदात के समय बरामद की गई गोलियों की अदालत में भौतिक रूप से जांच भी की। अदालत ने यह जानने का प्रयास किया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ के कथित हस्ताक्षर या पहचान चिन्ह वास्तव में गोली पर मौजूद हैं या नहीं।
फॉरेंसिक तथ्यों की अदालत में जांच
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस Sheel Nagu और जस्टिस Vikram Aggarwal की खंडपीठ ने केस प्रॉपर्टी के रूप में पेश की गई ‘लापुआ’ श्रेणी की सॉफ्ट-लीड गोली का निरीक्षण किया।
कोर्ट ने यह भी देखा कि जिस प्लास्टिक कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर All India Institute of Medical Sciences की सील सुरक्षित और अक्षुण्ण बताई गई थी।
सीलबंद कंटेनर को लेकर उठे सवाल
बचाव पक्ष का कहना था कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से निकाली गई गोली को बरामदगी से लेकर ट्रायल कोर्ट में खोले जाने तक सीलबंद रखा गया था। अगर कंटेनर पर लगी दोनों सील सुरक्षित थीं, तो बिना कंटेनर खोले फॉरेंसिक विशेषज्ञ द्वारा गोली की जांच और उस पर हस्ताक्षर किए जाने का दावा कैसे संभव है।
बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि कंटेनर पर एम्स की दोनों सील सही अवस्था में थीं, जिससे यह सवाल उठता है कि कंटेनर खोले बिना अंदर रखी वस्तु तक किसी की पहुंच कैसे हुई।
अभियोजन पक्ष ने दी यह दलील
वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में फॉरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही स्पष्ट थी। विशेषज्ञ ने कंटेनर खोलकर जांच करने और आवश्यक हस्ताक्षर किए जाने की बात कही थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान इस प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि यह गोली आयातित ‘लापुआ’ श्रेणी की सॉफ्ट-लीड गोली है, जिस पर समय के साथ निशान स्पष्ट रूप से बने रहना आवश्यक नहीं होता। हालांकि अदालत के अवलोकन में गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दिए।
फॉरेंसिक साक्ष्यों पर टिका था पूरा मामला
यह पूरा मामला फॉरेंसिक साक्ष्यों और गोली की जांच प्रक्रिया पर टिका हुआ था। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद डेरा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को पत्रकार Ramchandra Chhatrapati हत्याकांड में बरी कर दिया, जबकि तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी गई है।
टाइमलाइन: रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड
2002:
सिरसा के पत्रकार Ramchandra Chhatrapati ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े विवादित पत्र और आरोपों को प्रकाशित किया।
24 अक्टूबर 2002:
पत्रकार छत्रपति पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाकर हमला किया।
21 नवंबर 2002:
गंभीर रूप से घायल छत्रपति की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
2003:
मामले की जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी गई।
2007:
सीबीआई ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया और डेरा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh सहित अन्य आरोपियों को आरोपी बनाया।
2019:
सीबीआई की विशेष अदालत ने राम रहीम और अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
2019:
राम रहीम ने सजा और दोष सिद्धि को चुनौती देते हुए Punjab and Haryana High Court में अपील दाखिल की।
2026:
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद राम रहीम को बरी कर दिया, जबकि अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी।











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