April 5, 2026 1:28 pm

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CHANDIGARH: प्राइवेट स्कूलों की ‘बुक-शॉप मोनोपोली’ पर मेयर सौरभ जोशी सख्त: अभिभावकों की आवाज़ का प्रशासन ने लिया संज्ञान

रमेश गोयत

चंडीगढ़, 8 मार्च 2026: चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने शहर के प्राइवेट स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद के मामलों में अभिभावकों को हो रही समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लिया है। उन्होंने यू.टी. चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश जारी करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
हाल के दिनों में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने मेयर कार्यालय से संपर्क कर शिकायत की है कि उनके बच्चे जिन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं, वहाँ किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद को लेकर उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि कई स्कूल अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें केवल कुछ चयनित बुक स्टोर्स और दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है और उनकी खरीदारी की स्वतंत्रता भी सीमित हो रही है।

मेयर सौरभ जोशी ने इस विषय पर कहा:
“यह एक सर्वविदित तथ्य है कि कई स्कूलों की किताबें और यूनिफॉर्म केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध करवाई जाती हैं। इससे एक प्रकार की मोनोपोली (एकाधिकार) बन जाती है। अभिभावकों के पास अन्य विकल्प नहीं बचते और उन्हें आर्थिक और मानसिक दबाव झेलना पड़ता है। शिक्षा एक पवित्र क्षेत्र है, इसे किसी भी प्रकार की व्यावसायिकता या मनमानी का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।”
मेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं। यदि कोई संस्था नियमों का पालन न करते हुए अभिभावकों का शोषण करती है, तो उस पर कड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाना आवश्यक है।

अभिभावकों की समस्याएँ और उनके अनुभव
अभिभावकों ने शिकायत की है कि स्कूल अक्सर यह कहते हैं कि उनकी किताबें केवल उन ही दुकानों पर उपलब्ध हैं जिन्हें स्कूल द्वारा चयनित किया गया है। कई मामलों में यह दुकानों की संख्या अत्यंत सीमित होती है और ये दुकाने स्कूल के निकट या हीमाहीन स्थानों पर स्थित होती हैं। परिणामस्वरूप अभिभावकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, अतिरिक्त समय और परिवहन खर्च उठाना पड़ता है और कभी-कभी उन दुकानों में किताबें स्टॉक में नहीं होने के कारण उन्हें अन्य विकल्प तलाशने पड़ते हैं।
कुछ अभिभावकों ने यह भी बताया कि जब उन्होंने किसी अन्य दुकान से किताबें खरीदने की कोशिश की, तो स्कूल ने उन्हें अस्वीकार कर दिया या बच्चों को किताबें स्वीकार नहीं कीं। इससे बच्चों के स्कूल में प्रवेश और पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ता है।

मेयर जोशी के सुझाव और प्रशासनिक कदम
मेयर जोशी ने शिक्षा विभाग से निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
मोनोपली प्रथा का समाप्तिकरण:
स्कूलों को अभिभावकों को केवल चयनित दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

टोल-फ्री हेल्पलाइन की स्थापना:
शिक्षा विभाग को निर्देश दिए जाने चाहिए कि एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए। इससे यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो अभिभावक आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दुकानों और वेंडर्स की सूची:
सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे उन दुकानों और वेंडर्स की सूची शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं जहाँ उनकी किताबें और यूनिफॉर्म उपलब्ध हैं। शिक्षा विभाग इस सूची को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करे, ताकि अभिभावकों को स्वतंत्र विकल्प मिल सके।

नगर निगम की निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई:
मेयर जोशी ने नगर निगम चंडीगढ़ को इस प्रक्रिया में शामिल करने का सुझाव दिया ताकि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाए, तो उस पर उचित जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

मेयर सौरभ जोशी के प्रमुख बयान
मेयर जोशी ने कहा:
“अभिभावकों को मजबूर करना कि वे केवल चयनित दुकानों से ही किताबें खरीदें, किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यह प्रथा तुरंत बंद होनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था केवल बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए है, व्यापार के लिए नहीं। यदि कोई स्कूल नियमों की आड़ में अभिभावकों का शोषण करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी स्कूल को किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री में मोनोपोली बनाने की अनुमति न मिले। अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित और प्रभावी समाधान शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए आवश्यक है।

प्राइवेट स्कूलों में बुक-शॉप मोनोपोली
शहर में कई प्राइवेट स्कूल वर्षों से यह प्रथा अपना रहे हैं कि वे किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री केवल कुछ चुनिंदा दुकानों तक सीमित कर देते हैं। इस स्थिति में अभिभावकों के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रथा शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत है। शिक्षा का मुख्य लक्ष्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है, न कि किसी विशेष दुकान या विक्रेता को लाभ पहुंचाना।

प्रशासन की भूमिका
चंडीगढ़ प्रशासन, विशेषकर शिक्षा विभाग और नगर निगम, अब इस दिशा में कदम उठा रहा है। अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने स्कूलों की किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का निर्देश जारी किया है।
मेयर जोशी का कहना है कि स्कूलों को यह स्पष्ट निर्देश मिलना चाहिए कि वे केवल चयनित दुकानों पर ही निर्भर न रहें और अभिभावकों को विकल्प प्रदान करें।

मेयर सौरभ जोशी ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि चंडीगढ़ में शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बने। अभिभावकों की आवाज़ को अनदेखा नहीं किया जा सकता और प्रशासन को इस दिशा में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
इस पहल से न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा अनुभव को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। शिक्षा केवल सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं, और इसे इसी दृष्टिकोण से संरचित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
यह लेख लगभग 1000 शब्दों में तैयार किया गया है। इसमें सभी प्रमुख बिंदु, पृष्ठभूमि, मेयर के बयान और अभिभावकों की समस्याएँ विस्तार से शामिल हैं।

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Author: BabuGiri Hindi

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