वैश्विक तनाव का असर: निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूबे, ऑटो-एविएशन सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
मुंबई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आए उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आ गई और बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।
कारोबार की शुरुआत में ही बड़ी गिरावट
कारोबार के शुरुआती घंटों में BSE Sensex 972.99 अंक यानी 1.27 प्रतिशत गिरकर 75,890.72 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह Nifty 50 भी 299.45 अंक यानी 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,567.15 पर फिसल गया।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए शेयरों से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में तेज गिरावट देखी गई।
कच्चे तेल की कीमतों में आग
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का तेजी से बढ़ना माना जा रहा है। Brent Crude की कीमतें मनोवैज्ञानिक स्तर 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं। एशियाई ट्रेडिंग सत्र के दौरान इसमें करीब 9.16 प्रतिशत की उछाल दर्ज हुई और यह 101.53 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
यह तेजी मुख्य रूप से Iran और United States के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा Strait of Hormuz में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों के कारण आई है। इस क्षेत्र से विश्व के बड़े हिस्से में तेल की सप्लाई होती है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक बाजारों को प्रभावित करता है।
ऑटो, एविएशन और रियल्टी सेक्टर पर दबाव
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ता है जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर होती है। इसी कारण गुरुवार को कई सेक्टरों में तेज गिरावट देखी गई।
निफ्टी ऑटो इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। ईंधन महंगा होने से वाहन उत्पादन लागत बढ़ने और बिक्री घटने की आशंका बढ़ गई है।
एविएशन सेक्टर के शेयरों में भी भारी दबाव देखा गया। विमान ईंधन (ATF) महंगा होने से एयरलाइंस के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
पेंट्स और केमिकल कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट रही क्योंकि इनके कच्चे माल का बड़ा हिस्सा पेट्रोकेमिकल आधारित होता है।
आईटी सेक्टर ने अन्य सेक्टरों की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई, हालांकि इसमें भी हल्की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में बढ़ी घबराहट
बाजार की अस्थिरता का अंदाजा India VIX से लगाया जा सकता है, जो 6.08 प्रतिशत उछलकर 22.34 के स्तर पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि निवेशकों को आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव की आशंका है।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि Nifty 50 के लिए 23,500 से 23,600 का स्तर बेहद अहम सपोर्ट जोन है। यदि बाजार इस स्तर के नीचे बंद होता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में यदि Brent Crude लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था पर कई तरह के दबाव बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है,
मुद्रास्फीति में वृद्धि हो सकती है,
और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, विशेष रूप से Iran-United States के बीच बढ़ते तनाव और सरकार की संभावित आर्थिक रणनीतियों पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की दिशा भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।











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