April 5, 2026 6:46 pm

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नन्हा मैकेनिक

नन्हा मैकेनिक

नन्हे-नन्हे हाथों में,

पकड़ी पानी की धार,

गाड़ी धोने निकला देखो,

मेरा छोटा होशियार।

खुला हुआ है बोनट सारा,

झाँक रहा वो अंदर,

जैसे कोई राज़ छुपा हो,

सीखे काम ये सुंदर।

छप-छप पानी, हँसी ठिठोली,

भीग गई है राह,

नन्हा मन तो खुशियों वाला,

नहीं किसी की चाह।

कभी इधर तो कभी उधर,

घुमे पाइप की नली,

लगता जैसे खेल-खेल में

कर दे दुनिया भली।

छोटी-सी ये कोशिश उसकी,

सीख बड़ी सिखलाए,

मेहनत करने वालों को ही

जीवन आगे बढ़ाए।

माँ की आँखों का है तारा,

पापा का अभिमान,

नन्हा-सा ये काम ही उसका

बन जाएगा पहचान।

— डॉ. सत्यवान सौरभ

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Author: BabuGiri Hindi

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