June 13, 2026 11:45 am

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CHANDIGARH NEWS: गरीबों की जमा-पूंजी पर डाका! चंडीगढ़ सहकारी बैंक में लाखों की कथित हेराफेरी का आरोप

रसीद पूरी रकम की, खाते में जमा हुई कम राशि; बैंक प्रबंधन, कर्मचारियों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल

बैंकिंग व्यवस्था में भरोसे को झटका, सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली कटघरे में

यदि आउटसोर्स कर्मचारी ने किया लेनदेन, तो जिम्मेदार कौन—प्रबंधक या प्रबंधन?

शाखा प्रबंधक की भूमिका पर उठे सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग तेज

आरसीएस, पुलिस और विजिलेंस तक पहुंची शिकायत, कार्रवाई नहीं होने से मामले को दबाने के आरोप

बैंक के दूसरे खाते भी विजिलेंस जांच की मांग

आरसीएस ऑफिस भाग रहा अपनी जिम्मेदारी से

कार्यवाही तो दूर, लिखित शिकायतें का भी नही दे रहा जबाब,

रमेश गोयत
चंडीगढ़,11 जून। चंडीगढ़ का सहकारी बैंक पिछले कई सालों से वादविवाद में अव्व्ल माना जा रहा है, चाहे पूर्व बैंक चेयरमैन व निदेशकों का हो, बैक में कर्मचारियों की भर्ती का हो। मगर अब चंडीगढ़ के गरीबों के साथ एक नया ही धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जिसमे जमा रसीद तो पूरी, बैंक रिकॉर्ड में कम जमा।
चंडीगढ़ सहकारी बैंक की सेक्टर-61 शाखा में गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों की मेहनत की कमाई में कथित हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप हैं कि बैंक में नगर निगम के मकानों की लीज मनी जमा करवाने पहुंचे लोगों से पूरी राशि तो ली गई, लेकिन बैंक खातों में कम रकम दर्ज कर शेष धनराशि का गबन किया जाता रहा। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों और कथित सबूतों के बावजूद मामला पुलिस और विजिलेंस तक पहुंचने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है, जिससे पूरे प्रकरण को दबाने की आशंका जताई जा रही है।
मामले ने बैंकिंग व्यवस्था की पारदर्शिता, शाखा प्रबंधन की जवाबदेही और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

नगर निगम की लीज मनी जमा कराने वालों को बनाया गया निशाना
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ सहकारी बैंक की सेक्टर-61, मलोया, मौलीजागरां और सेक्टर-17 शाखाओं में नगर निगम के मकानों की लीज मनी जमा कराने के लिए खाते संचालित हैं। बड़ी संख्या में लोग हर वर्ष इन खातों में अपनी लीज राशि जमा करवाते हैं।
आरोप है कि सेक्टर-61 शाखा में कुछ कर्मचारियों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर गरीब और कम शिक्षित लोगों को निशाना बनाया। विशेष रूप से सेक्टर-52 बी कजहेड़ी क्षेत्र के कई लोगों ने अपनी लीज राशि जमा करवाई थी, जिनके खातों में बाद में भारी अंतर पाया गया।

4000 रुपये जमा, खाते में पहुंचे सिर्फ 400 रुपये
शिकायतकर्ताओं के अनुसार बैंक काउंटर पर पूरी राशि लेने के बाद कर्मचारियों ने बैंक की आधिकारिक मोहर लगी रसीद भी जारी की। लेकिन जब बैंक रिकॉर्ड की जांच की गई तो पता चला कि खातों में वास्तविक जमा राशि काफी कम दर्ज की गई थी।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में हजारों रुपये का अंतर सामने आया। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने 4,000 रुपये जमा करवाए तो उसे 4,000 रुपये की रसीद थमा दी गई, लेकिन बैंक खाते में मात्र 400 रुपये जमा दिखाए गए। शेष 3,600 रुपये कथित रूप से गायब हो गए।
इस तरह के कई मामलों के सामने आने के बाद पीड़ितों ने बैंक अधिकारियों से शिकायत की।

गरीबी और अशिक्षा का उठाया गया फायदा
पीड़ितों का कहना है कि अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं और बैंकिंग प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी रखते हैं। यही कारण रहा कि लंबे समय तक उन्हें इस कथित गड़बड़ी का पता नहीं चल पाया।
कई लोगों ने रसीदों को संभालकर नहीं रखा था, जबकि जिन लोगों के पास बैंक की मूल रसीदें सुरक्षित थीं, उन्होंने बाद में बैंक रिकॉर्ड से मिलान कर बड़ा अंतर पाया। इसके बाद मामला बैंक मुख्यालय तक पहुंचा।

बैंक मुख्यालय के अधिकारी ने आरसीएस, पुलिस और विजिलेंस को भेजे कथित सबूत
सूत्रों के अनुसार बैंक मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी जुटाने के बाद संबंधित दस्तावेजों और रसीदों के आधार पर आरसीएस,  सेक्टर-36 थाना पुलिस तथा विजिलेंस विभाग को लिखित शिकायत भेजी।
बताया जा रहा है कि शिकायत के साथ ऐसे दस्तावेज भी लगाए गए जिनसे जमा राशि और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसके बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर की जांच या एफआईआर की जानकारी सामने नहीं आई है।

मामला बढ़ा तो आउटसोर्स महिला कर्मचारी पर डाल दी जिम्मेदारी?
मामले ने जब तूल पकड़ना शुरू किया तो बैंक प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई। आरोप है कि शाखा स्तर पर जवाबदेही तय करने के बजाय पूरा मामला एक आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारी के सिर मढ़ दिया गया।
सूत्रों के अनुसार संबंधित महिला कर्मचारी से लिखित बयान लेकर उसे नौकरी से हटा दिया गया। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि बैंकिंग रिकॉर्ड में लंबे समय तक कथित हेराफेरी होती रही तो उसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
आलोचकों का कहना है कि क्या इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता केवल एक आउटसोर्स कर्मचारी के स्तर पर संभव थी या फिर इसके पीछे एक बड़ा तंत्र काम कर रहा था? यही सवाल अब जांच का विषय बन गया है।

नियम कहते हैं आउटसोर्स कर्मचारी नहीं संभाल सकते कैश काउंटर
बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैंकिंग नियमों के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों को नकदी लेनदेन और कैश काउंटर जैसे संवेदनशील वित्तीय कार्य नहीं सौंपे जा सकते।
यदि किसी आउटसोर्स कर्मचारी को कैश संबंधी जिम्मेदारी दी गई थी तो इसके लिए शाखा प्रबंधक और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
शाखा प्रबंधक और निगरानी तंत्र पर उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खातों में कम राशि जमा की जा रही थी तो शाखा प्रबंधक, लेखा शाखा, ऑडिट प्रणाली और उच्च अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था इसे पकड़ने में कैसे विफल रही?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली में हर लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। ऐसे में यदि लंबे समय तक कथित गड़बड़ी चलती रही तो इसकी जवाबदेही केवल निचले स्तर के कर्मचारी तक सीमित नहीं रह सकती।

पीड़ितों की मांग—दोषियों पर एफआईआर हो, पैसा वापस मिले
पीड़ित परिवारों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा हड़पी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि गरीब परिवारों की मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। यदि जांच एजेंसियां निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करतीं तो पीड़ित उच्च न्यायालय और अन्य सक्षम मंचों का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होंगे।

मुख्य बिंदु
नगर निगम मकानों की लीज मनी जमा करने वालों से कथित धोखाधड़ी का आरोप।
पूरी रकम की रसीद देने के बावजूद खातों में कम राशि जमा करने का मामला।
सेक्टर-61 शाखा पर सबसे गंभीर आरोप।
बैंक मुख्यालय के अधिकारी द्वारा पुलिस और विजिलेंस को शिकायत भेजे जाने की चर्चा।
कार्रवाई न होने पर मामले को दबाने के आरोप।
आउटसोर्स महिला कर्मचारी पर जिम्मेदारी डालकर मामला निपटाने की कोशिश के आरोप।
बैंकिंग नियमों के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को कैश काउंटर देने पर सवाल।
पीड़ितों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर एफआईआर की मांग उठाई।

बैंक MD और विजिलेंस सचिव एक ही अधिकारी, अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
चंडीगढ़ सहकारी बैंक में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि हाल ही में बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) का अतिरिक्त कार्यभार आईएएस अधिकारी कार्तिकेय को सौंपा गया है। जानकारी के अनुसार कार्तिकेय चंडीगढ़ प्रशासन में सेक्रेटरी विजिलेंस का दायित्व भी संभाल रहे हैं। कार्तिकेय युटी काडर के आईएएस अधिकारी है। उनकी एक ईमानदार छवि बताई जा रही है।

मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं और आम लोगों का कहना है कि जब बैंक के सर्वोच्च प्रशासनिक पद और विजिलेंस विभाग दोनों की जिम्मेदारी एक ही वरिष्ठ अधिकारी के पास है, तो इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित की जा सकती है। लोगों का मानना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी कर्मचारियों, अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पीड़ितों का कहना है कि बैंक में गरीब लोगों की जमा राशि से जुड़ा मामला होने के कारण इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच को लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नई प्रशासनिक व्यवस्था के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।
लोगों की मांग है कि बैंक में कथित गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाई जाए तथा पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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