June 10, 2026 1:47 pm

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CHANDIGARH: मेट्रो से लेकर नशा, पुलिस और विकास तक—प्रशासक कटारिया ने चंडीगढ़ के हर मुद्दे पर रखी बेबाक राय

जयपुर मेट्रो का उदाहरण देकर बोले—बिना जरूरत और खर्च की समीक्षा के नहीं होनी चाहिए बड़ी योजनाएं
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ लगातार चल रही सख्त कार्रवाई के बावजूद इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने यह बात स्वीकार करते हुए कहा कि हालात पहले से बेहतर जरूर हुए हैं, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई है। वीरवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित मीट द प्रेस कार्यक्रम में प्रशासक ने शहर से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर प्रशासन का रुख और भविष्य की दिशा स्पष्ट की।

मेट्रो प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार के संकेत, जयपुर का दिया उदाहरण
शहर में बढ़ते ट्रैफिक के बीच वर्षों से लंबित मेट्रो प्रोजेक्ट पर प्रशासक कटारिया ने साफ कहा कि मेट्रो तकनीकी रूप से अच्छी योजना हो सकती है, लेकिन इसे लागू करने से पहले इसकी वास्तविक उपयोगिता और लागत की गहन समीक्षा जरूरी है।
उन्होंने जयपुर मेट्रो का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मेट्रो पर किए गए भारी खर्च से अब तक ब्याज तक की भरपाई नहीं हो सकी। ऐसे में चंडीगढ़ जैसे हेरिटेज शहर में मेट्रो परियोजना को केवल आंकड़ों और दिखावे के आधार पर आगे बढ़ाना सही नहीं होगा।
हेरिटेज सिटी होने से बढ़ेगी लागत, अंडरग्राउंड मेट्रो बनाना मजबूरी
प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ के हेरिटेज स्टेटस के कारण मेट्रो को अंडरग्राउंड बनाना पड़ेगा, जिससे लागत कई गुना बढ़ जाएगी और शहर को लंबे समय तक खुदाई जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मेट्रो तभी लाभकारी साबित होगी जब इसे आसपास के शहरों से जोड़ा जाए और साथ ही शहर की बस सेवा को और मजबूत किया जाए।
पुलिस नेतृत्व पर स्पष्टता, अगला एसएसपी भी पंजाब कैडर से ही
पुलिस विभाग में संभावित बदलावों को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए प्रशासक कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ के अगले एसएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) भी पंजाब कैडर से ही होंगे। यह एक पुरानी और स्थापित परंपरा है, जो आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान एसएसपी कंवरदीप कौर का कार्यकाल मार्च में पूरा हो रहा है, लेकिन फिलहाल किसी बदलाव की योजना नहीं है। साथ ही पंजाब और हरियाणा कैडर के बीच 60:40 का अनुपात भी बरकरार रहेगा।
डिपुटेशन नीति सख्त, सात साल बाद वापसी अनिवार्य
प्रशासक ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ में डिपुटेशन पर तैनात अधिकारियों के लिए नई नीति लागू हो चुकी है। इसके तहत अब कोई भी अधिकारी अधिकतम सात साल तक ही डिपुटेशन पर रह सकेगा।
सात साल पूरे होने के बाद संबंधित अधिकारी को अनिवार्य रूप से अपने मूल कैडर में लौटना होगा। अब अस्थायी विस्तार की व्यवस्था खत्म कर दी गई है।

इंदौर हादसे के बाद अलर्ट प्रशासन, बदली जाएंगी पुरानी पाइपलाइनें
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों की घटना से सबक लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन भी सतर्क हो गया है। प्रशासक कटारिया ने बताया कि शहर में पानी और सीवर की पुरानी पाइपलाइनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा।
नगर निगम अधिकारियों को जल्द से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि शहर की 80 प्रतिशत से अधिक पाइपलाइनें काफी पुरानी हो चुकी हैं।
मेयर का एक साल का कार्यकाल बताया अपर्याप्त
मेयर के एक साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए प्रशासक ने कहा कि इतने कम समय में कोई भी मेयर शहर के लिए ठोस और दूरगामी विकास नहीं कर सकता।
अक्सर ऐसा होता है कि एक मेयर द्वारा शुरू किए गए विकास कार्य अगले मेयर के कार्यभार संभालते ही या तो रुक जाते हैं या अधूरे रह जाते हैं। उन्होंने मेयर का कार्यकाल कम से कम ढाई से पांच साल करने का समर्थन किया और कहा कि इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा।

नगर निगम में दल-बदल विरोधी कानून पर मंथन जारी
नगर निगम चुनावों में पार्षदों के दल बदलने पर एंटी-डिफेक्शन कानून लागू करने के सवाल पर प्रशासक कटारिया ने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नामित पार्षदों को वोटिंग अधिकार नहीं दिया गया है और उनकी संख्या कुल सदस्यों के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
ऑनलाइन सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक लगाम
प्रशासक ने माना कि सरकारी तंत्र से भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है, लेकिन सेवाओं के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि आम लोगों से जुड़ी प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ है, हालांकि बड़े मामलों में जांच लंबी चलने से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।

गांव भी प्रशासन की प्राथमिकता, खुद जाकर सुनेंगे समस्याएं
कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ के सेक्टरों के साथ-साथ गांव भी प्रशासन की प्राथमिकता में हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं गांवों तक पहुंचाना प्रशासन का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि धनास गांव का दौरा किया जा चुका है और आने वाले समय में अन्य गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

स्ट्रीट डॉग समस्या पर सख्ती, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस होंगी लागू
स्ट्रीट डॉग की बढ़ती समस्या पर प्रशासक ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार डॉग बायलॉज और गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कराया जाएगा।
शहर में कुत्तों के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिन्हें रोकना प्रशासन की प्राथमिकता होगी।
नशे के खिलाफ समाज की भूमिका अहम, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता पर जोर
प्रशासक कटारिया ने कहा कि केवल कानून बनाकर नशे को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने बताया कि पुलिस की कार्रवाई से नशे पर काफी हद तक अंकुश लगा है और हालात पहले से बेहतर हुए हैं।
साथ ही उन्होंने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में मजबूत जागरूकता अभियान चलाने पर जोर देते हुए कहा कि भले ही इसके नतीजे वर्षों बाद दिखें, लेकिन युवाओं को शिक्षित करना नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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