बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 5 अगस्त: चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने नगर निगम की 31 जुलाई 2026 को हुई 363वीं जनरल हाउस बैठक में दो पन्नों के टेबल एजेंडे के माध्यम से ₹227 करोड़ के वित्तीय प्रस्ताव को पारित किए जाने पर भाजपा और नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे “₹227 करोड़ का टेबल एजेंडा घोटाला” बताते हुए कहा कि यह लोकतंत्र, पारदर्शिता और जनता के विश्वास पर सीधा हमला है।
प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए लक्की ने आरोप लगाया कि भाजपा ने नगर निगम सदन को चर्चा और जवाबदेही का मंच बनाने के बजाय केवल औपचारिक मंजूरी देने वाली संस्था बना दिया है। उनका कहना था कि करोड़ों रुपये के प्रस्ताव को बिना पर्याप्त दस्तावेज, बिना तकनीकी जानकारी और बिना विस्तृत चर्चा के पारित कराना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रस्ताव पूरी तरह पारदर्शी था तो इसे निर्धारित नियमों के अनुसार 72 घंटे पहले पार्षदों को क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी कि जनता के टैक्स के ₹227 करोड़ के प्रस्ताव को अंतिम समय में केवल दो पन्नों के टेबल एजेंडे के जरिए मंजूरी दिलाई गई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि Punjab Municipal Corporation Act, 1976 (जैसा कि चंडीगढ़ में लागू है) की धारा 57 के अनुसार बैठक का एजेंडा कम से कम 72 घंटे पहले उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहीं, यदि कोई अतिरिक्त विषय शामिल करना हो तो संबंधित नियमों के तहत निर्धारित समय सीमा में सप्लीमेंट्री एजेंडा जारी किया जाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों की अनदेखी कर पूरी प्रक्रिया को संदेह के घेरे में डाल दिया गया।
लक्की ने यह भी कहा कि ₹227 करोड़ की परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारी सदन के समक्ष नहीं रखी गई। उन्होंने सवाल किया कि परियोजना में किन पाइपलाइनों पर कार्य होना है, पुरानी पाइपलाइन बदली जानी है या नई बिछाई जानी है, पाइप का आकार क्या होगा, तकनीकी आवश्यकता क्या है और लागत का आधार क्या है—इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नगर निगम को जनसेवा की संस्था के बजाय भ्रष्टाचार का केंद्र बनाने का प्रयास कर रही है और कांग्रेस जनता के धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की अपारदर्शिता स्वीकार नहीं करेगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने जांच पूरी होने तक ₹227 करोड़ के प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की।
लक्की ने परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), तकनीकी स्वीकृतियां, लागत का मदवार विवरण, टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय अनुमोदन तथा संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि इससे जनता के सामने पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
उन्होंने भविष्य में करोड़ों रुपये के किसी भी वित्तीय प्रस्ताव को टेबल एजेंडे के माध्यम से पारित करने पर रोक लगाने तथा सभी प्रस्ताव निर्धारित समय सीमा के भीतर पार्षदों को उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई, ताकि उनकी तकनीकी और वित्तीय समीक्षा के साथ लोकतांत्रिक चर्चा सुनिश्चित हो सके।
अंत में एच.एस. लक्की ने कहा कि नगर निगम किसी राजनीतिक दल की निजी संस्था नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की जनता की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और जनता के टैक्स के प्रत्येक रुपये का हिसाब नगर निगम प्रशासन और भाजपा को देना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक पूरी मजबूती से उठाएगी।













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