रमेश गोयत
चंडीगढ़, 12 अगस्त: चंडीगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम थाना टीम ने अंदानी गैस बिल के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक साइबर अपराधी को झारखंड के जामताड़ा जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 23 वर्षीय बिमल कुमार मंडल उर्फ विदुर के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 10 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें एडानी गैस ग्राहकों का डाटा और कथित रूप से ठगी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एपीके फाइलें मिली हैं।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई एफआईआर नंबर 81, दिनांक 15 जून 2026 के तहत की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत साइबर क्राइम थाना, सेक्टर-17, चंडीगढ़ में दर्ज किया गया था।
व्हाट्सऐप पर भेजते थे मैसेज
जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर लोगों को व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल के जरिए संपर्क करता था। उन्हें बताया जाता था कि पिछले महीने का एडानी गैस बिल जमा नहीं हुआ है और बिल का भुगतान या गैस कनेक्शन अपडेट नहीं करने पर कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद पीड़ितों को गैस कनेक्शन अपडेट करने के नाम पर एक एपीके एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था।
पुलिस के मुताबिक, इस एपीके के जरिए पीड़ित के मोबाइल फोन तक अनधिकृत पहुंच हासिल की जाती थी। इसके बाद डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के माध्यम से कथित तौर पर अनधिकृत लेन-देन किए जाते थे। इस मामले में पीड़ित को करीब 6 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।
टेलीग्राम से हासिल करता था डाटा और एपीके
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए किसी व्यक्ति से एडानी गैस ग्राहकों का डाटा और मालवेयर वाली एपीके फाइलें हासिल करता था। इसके बाद इसी डाटा का इस्तेमाल ग्राहकों को निशाना बनाने के लिए किया जाता था।
ठगी से हासिल रकम कथित तौर पर साइबर ठगी नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक विभिन्न बैंक खातों, वॉलेट और अन्य माध्यमों के जरिए पहुंचाई जाती थी।
10 मोबाइल फोन बरामद
पुलिस टीम ने झारखंड के जामताड़ा जिले में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से कुल 10 मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार इन मोबाइल फोन में एडानी गैस ग्राहकों का डाटा और एपीके फाइलें मौजूद थीं तथा इनका इस्तेमाल पीड़ितों को कॉल करने और व्हाट्सऐप संदेश भेजने में किया जाता था।
एडानी गैस के अंदरूनी कर्मचारी की भूमिका की भी जांच
जांच के दौरान पुलिस को एडानी गैस के एक अंदरूनी कर्मचारी की संभावित भूमिका पर भी संदेह हुआ है। पुलिस के अनुसार उक्त कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर ग्राहकों का डाटा आरोपी तक पहुंचाए जाने की आशंका है। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
पांच दिन के पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।














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