थिएटर के साथ संगीत ने जमाया रंग, यशपाल शर्मा व जतिन सरना रहे अतिथि
रोहतक | 10 फरवरी 2026। दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित भारत रंग महोत्सव (भारंगम) और यूनिवर्सिटी के अपने महोत्सव ‘सारंग’ के दूसरे दिन थिएटर और संगीत का शानदार संगम देखने को मिला। मंगलवार को तमिल थिएटर प्रस्तुति और मंडी हाउस के म्यूजिक ग्रुप की मनमोहक प्रस्तुति ने ‘सारंग’ में दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जबकि शाम के सत्र में ‘भारंगम’ के अंतर्गत पंजाबी नाटक ‘संबल बार’ का दमदार मंचन हुआ।
संवाद सत्र में शामिल हुए यशपाल शर्मा व जतिन सरना
‘सारंग’ के दूसरे दिन सुबह के सत्र में प्रसिद्ध अभिनेता यशपाल शर्मा और जतिन सरना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलगुरु डॉ. अमित आर्य और रजिस्ट्रार गुंजन मलिक मनोचा ने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
संवाद सत्र के दौरान दोनों कलाकारों ने थिएटर, अभिनय और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को छात्रों के साथ साझा किया। इस अवसर पर थिएटर डायरेक्टर लक्ष्मी रावत ने भी रंगमंच से जुड़े अपने अनुभव रखे। कार्यक्रम में प्रदेशभर के थिएटर से जुड़े कलाकारों और निर्देशकों को सम्मानित भी किया गया।

तमिल-इंग्लिश नाटक और छात्र प्रस्तुतियां रहीं आकर्षण
दोपहर के सत्र में तमिल और अंग्रेजी भाषा में नाटक ‘पेन नदई कूथु – महिलाओं की चाल’ का प्रभावशाली मंचन हुआ। इसके साथ ही डीएलसीसुपवा के छात्रों ने अपनी विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
“सुपवा में दाखिले को तरसेंगे छात्र” – यशपाल शर्मा
अभिनेता यशपाल शर्मा ने अभिनय की बारीकियों पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि आज का दौर सीखने और सृजन की अपार संभावनाओं से भरा है। उन्होंने छात्रों को मोबाइल फोन का सीमित और सही उपयोग करने की सलाह दी, क्योंकि अत्यधिक मोबाइल उपयोग से फोकस प्रभावित होता है, जबकि अभिनय और कला के क्षेत्र में एकाग्रता बेहद जरूरी है।
उन्होंने किसी भी किरदार को निभाने से पहले उसके कैरेक्टराइजेशन पर जोर देते हुए कहा कि स्क्रिप्ट को चार-पांच बार बिना बोले पढ़ना चाहिए, ताकि किरदार की पूरी समझ विकसित हो सके।
भरत मुनि के नाट्यशास्त्र के चार अभिनय तत्व—वाचिक, आंगिक, आहार्य और सात्विक—पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला। यशपाल शर्मा ने कहा,
“सुपवा जैसा संस्थान हमारे प्रदेश में होना गर्व की बात है। मुझे लगता है, वह समय आएगा जब छात्र यहां दाखिला लेने के लिए तरसेंगे।”

“पढ़ना, देखना और समझना जरूरी” – जतिन सरना
अभिनेता जतिन सरना ने कहा कि अच्छा अभिनेता बनने के लिए निरंतर अभ्यास के साथ-साथ पढ़ना, देखना और समझना बेहद जरूरी है। केवल कुछ नाटकों या मंचों पर काम कर लेने से अभिनेता परिपक्व नहीं हो जाता।
उन्होंने सुपवा को एक शानदार संस्थान बताते हुए कहा कि यहां छात्रों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिल रही हैं, जिनका पूरा लाभ उठाकर उन्हें आगे बढ़ना चाहिए। ‘भारंगम’ और ‘सारंग’ जैसे भव्य आयोजनों के लिए उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को बधाई दी।
सुपवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास – कुलगुरु डॉ. अमित आर्य
कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने कहा कि ‘सुपवा’ शब्द छठ पूजा से जुड़ा एक पवित्र शब्द है, जो अर्घ्य देने वाली सजी थाली का प्रतीक है।
उन्होंने यशपाल शर्मा की बात को दोहराते हुए कहा कि वह समय दूर नहीं जब देशभर के छात्र सुपवा में दाखिले के लिए उत्सुक होंगे। यूनिवर्सिटी को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
थिएटर से जुड़े कलाकारों का सम्मान
25वें ‘भारंगम’ और ‘सारंग’ महोत्सव के दौरान प्रदेशभर के उन कलाकारों और निर्देशकों को सम्मानित किया जा रहा है, जो रंगमंच को जीवित रखने में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
अब तक सम्मानित किए गए प्रमुख नामों में नरेश प्रेरणा, केसरी नंदन, रवि मोहन, मनीष जोशी, कृष्ण नाटक, संगीता किमोठी, मदन डागर, सतीश मस्तान, रमेश मूर्ति, अविनाश सैनी, अमनजीत, डॉ. आनंद शर्मा और रघुवेंद्र मलिक शामिल हैं।











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