June 21, 2026 6:08 pm

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चंडीगढ़ यूटी में वीआईपी नंबरों की ई-ऑक्शन से सरकार को भारी कमाई, CH01-DD-0001 सबसे महंगा नंबर बिका

तीन दिन की नीलामी में 591 रजिस्ट्रेशन नंबर बिके, 4.48 करोड़ रुपये का राजस्व

चंडीगढ़: यूटी चंडीगढ़ के Registering & Licensing Authority, Chandigarh द्वारा नई वाहन रजिस्ट्रेशन सीरीज़ CH01-DD के फैंसी और चॉइस नंबरों की ई-ऑक्शन सफलतापूर्वक संपन्न कर ली गई है। 4 मार्च से 6 मार्च 2026 तक चली इस ऑनलाइन नीलामी में कुल 591 वाहन रजिस्ट्रेशन नंबरों की बोली लगी, जिससे प्रशासन को 4 करोड़ 48 लाख 87 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
प्रशासन के अनुसार, इस ई-ऑक्शन में नई सीरीज़ 0001 से 9999 तक के नंबरों के साथ-साथ पिछली सीरीज़ के बचे हुए फैंसी और विशेष नंबर भी शामिल किए गए थे। नीलामी में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कई नंबरों पर लाखों रुपये तक की बोली लगी।

CH01-DD-0001 सबसे महंगा नंबर
नीलामी में सबसे ज्यादा बोली CH01-DD-0001 नंबर के लिए लगी। इस वीआईपी नंबर को 53 लाख 88 हजार रुपये में खरीदा गया, जो पूरी नीलामी का सबसे महंगा नंबर रहा।
वहीं CH01-DD-0003 नंबर 32 लाख 32 हजार रुपये में बिककर दूसरे स्थान पर रहा। इन दोनों नंबरों की ऊंची बोली से स्पष्ट है कि शहर में फैंसी नंबरों के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।

इन नंबरों पर भी लगी लाखों की बोली
ई-ऑक्शन में कई अन्य नंबर भी लाखों रुपये में बिके। प्रमुख नंबर और उनकी अंतिम बोली इस प्रकार रही:
CH01-DD-0001 – ₹53,88,000
CH01-DD-0003 – ₹32,32,000
CH01-DD-0005 – ₹17,50,000
CH01-DD-0009 – ₹14,40,000
CH01-DD-0007 – ₹14,22,000
CH01-DD-1000 – ₹9,19,000
CH01-DD-0006 – ₹8,50,000
CH01-DD-0008 – ₹8,24,000
CH01-DD-0002 – ₹7,25,000
CH01-DD-0100 – ₹6,23,000
इन नंबरों पर लगी बोली से यह साफ है कि 0001, 0003, 0005 और 0009 जैसे विशेष अंकों वाले नंबरों की मांग सबसे अधिक रही।

ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता
प्रधुम्न सिंह आरएलए सेक्रेटरी ने बताया कि पूरी नीलामी ई-ऑक्शन प्रणाली के माध्यम से की गई, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही। इच्छुक वाहन मालिकों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर अपनी पसंद के नंबरों के लिए बोली लगाई।

प्रशासन को हर बार मिलती है अच्छी आमदनी
चंडीगढ़ में हर नई वाहन सीरीज़ जारी होने पर फैंसी नंबरों की नीलामी की जाती है। इससे प्रशासन को हर बार करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। वाहन मालिकों में भी अपने वाहनों के लिए यूनिक और वीआईपी नंबर लेने का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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