चंडीगढ़:“सिटी ब्यूटीफुल” के नाम से दुनिया भर में पहचाने जाने वाले Chandigarh के शहरी स्वरूप और विरासत को लेकर शहर के वरिष्ठ नागरिकों ने चिंता व्यक्त की है। वरिष्ठ नागरिक आर.के. गर्ग ने जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि चंडीगढ़ एक अनूठा शहर है, जिसकी प्रशासनिक और नियोजन व्यवस्था सामान्य शहरों से अलग है। यह न केवल एक केंद्र शासित प्रदेश है बल्कि दो राज्यों — Punjab और Haryana — की राजधानी भी है, इसलिए इसके विकास और प्रशासन को विशेष वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत संचालित किया जाता है।
आर.के. गर्ग ने कहा कि शहर की नियोजन संरचना और ऐतिहासिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए कई संस्थागत और कानूनी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनमें विशेष रूप से Chandigarh Capital Character Committee (सीएचसीसी) और शहर का मास्टर प्लान शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चंडीगढ़ के मूल स्वरूप, नियोजन दर्शन और विरासत को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस शहर की विशिष्ट पहचान को महसूस कर सकें।
विरासत पर खतरे की आशंका
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि हाल के समय में शहर में कुछ ऐसे विकास प्रस्ताव सामने आ रहे हैं जिनके कारण चंडीगढ़ के मूल स्वरूप पर खतरा पैदा हो सकता है। विशेष रूप से Tribune Flyover Project जैसे विकास कार्यों के बाद कुछ संस्थानों या व्यक्तियों द्वारा नए निर्माण प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इन परियोजनाओं को शहर की मूल योजना, पर्यावरणीय संतुलन और नैतिक सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए लागू किया गया तो इसका दूरगामी असर पड़ेगा। यह केवल एक अलग घटना नहीं होगी बल्कि ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है जो धीरे-धीरे चंडीगढ़ की उस पहचान को कमजोर कर देगी जिसके कारण यह शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
गलत फैसलों के असर पीढ़ियों तक रहते हैं
आर.के. गर्ग ने कहा कि आज जो लोग शासन और प्रशासन में निर्णय ले रहे हैं, वे हमेशा इस पद पर नहीं रहेंगे। समय के साथ सरकारें बदलती हैं और अधिकारी भी बदल जाते हैं, लेकिन यदि कोई गलत या अविवेकपूर्ण निर्णय लिया जाता है तो उसके परिणाम पीढ़ियों तक शहर को झेलने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आज चंडीगढ़ की विरासत और नियोजन के मूल सिद्धांतों से समझौता किया गया तो शहर को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि किसी भी बड़े विकास कार्य से पहले उसके दूरगामी प्रभावों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाए।
शहर के लोगों की भागीदारी जरूरी
प्रेस वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि दुर्भाग्यवश शहर के निवासी, जो वास्तव में चंडीगढ़ के सबसे बड़े हितधारक हैं, अक्सर ऐसे महत्वपूर्ण निर्णयों में अपनी बात रखने का अवसर नहीं पा पाते। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि शहर के भविष्य से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले आम नागरिकों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की राय अवश्य ली जानी चाहिए।
उनका कहना था कि जनभागीदारी से न केवल बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं बल्कि इससे शहर के लोगों का विश्वास भी मजबूत होता है।
चंडीगढ़ केवल इमारतों का समूह नहीं
आर.के. गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ केवल इमारतों और सड़कों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक सुविचारित शहरी दृष्टि और विश्व-स्तरीय नियोजन विरासत का प्रतीक है। इस शहर की योजना अंतरराष्ट्रीय स्तर के शहरी नियोजन सिद्धांतों के आधार पर बनाई गई थी, जिसके कारण आज भी इसे दुनिया के सबसे सुव्यवस्थित शहरों में गिना जाता है।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अल्पकालिक महत्वाकांक्षाओं या संस्थागत दबावों की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी
अपने वक्तव्य के अंत में आर.के. गर्ग ने कहा कि इतिहास केवल निर्णय लेने वालों का ही नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति का मूल्यांकन करता है। यदि आज हम समय रहते चंडीगढ़ की पहचान और उसके मूल स्वरूप की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाते, तो आने वाली पीढ़ियां हमें इसके लिए जिम्मेदार ठहरा सकती हैं।
उन्होंने शहर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन से अपील की कि चंडीगढ़ की विरासत और नियोजन की मूल अवधारणा को सुरक्षित रखने के लिए मिलकर प्रयास किए जाएं, ताकि “सिटी ब्यूटीफुल” की पहचान आने वाले समय में भी कायम रह सके।











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