April 6, 2026 1:30 am

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हरियाणा में भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता को मजबूती, सरकारी जमीन के नामकरण में होगा एकरूपता

स्पष्ट स्वामित्व प्रविष्टियों से बढ़ेगी जवाबदेही, भूमि विवादों में आएगी कमी
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य में भूमि प्रशासन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के नामकरण को एक समान करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य भूमि स्वामित्व से जुड़ी अस्पष्टताओं को समाप्त करना, सरकारी भूमि के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना है।
वित्तीय आयुक्त ने चंडीगढ़ में आयोजित विभागीय अधिकारियों की बैठक में कहा कि जमाबंदी अभिलेखों में स्वामित्व और खेती से संबंधित प्रविष्टियों का मानकीकरण बेहतर प्रशासन की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों में एक समान नामकरण लागू होने से सरकारी भूमि के वास्तविक स्वामित्व को लेकर उत्पन्न होने वाली भ्रम की स्थिति खत्म होगी और भविष्य में भूमि से जुड़े विवादों की संभावनाएं भी कम होंगी।
सरकारी भूमि के नामकरण में एकरूपता पर जोर
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि कई बार जमाबंदी अभिलेखों के स्वामित्व कॉलम में “प्रदेश सरकार”, “स्टेट गवर्नमेंट” या अन्य असंगत शब्दों का उपयोग किया जाता है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि भूमि का वास्तविक स्वामी कौन है।
इस स्थिति को दूर करने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी लागू हो, वहां स्वामित्व कॉलम में “हरियाणा सरकार” शब्द का ही उपयोग किया जाए। यह व्यवस्था हरियाणा भूमि अभिलेख नियमावली 2013 के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह सुधार केवल तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि के प्रबंधन में कानूनी स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
विभागों की भूमि का रिकॉर्ड होगा स्पष्ट
नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की भूमि का रिकॉर्ड भी स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जाएगा।
स्वामित्व कॉलम में “हरियाणा सरकार” लिखा जाएगा।
खेती या उपयोग से संबंधित कॉलम में उस विभाग का नाम दर्ज किया जाएगा, जो उस भूमि का उपयोग कर रहा है।
इस व्यवस्था से यह स्पष्ट रहेगा कि भूमि का स्वामी सरकार है, जबकि उसका उपयोग किस विभाग द्वारा किया जा रहा है।
राजस्व विभाग के अधीन आने वाली विशेष श्रेणी की जमीन जैसे संरक्षक भूमि, अधिशेष भूमि या नजूल भूमि में भी स्वामित्व “हरियाणा सरकार” के नाम पर ही दर्ज रहेगा। वहीं खेती या उपयोग वाले कॉलम में संबंधित नियंत्रण या विभाग का उल्लेख किया जाएगा।
केंद्र सरकार की भूमि के लिए अलग व्यवस्था
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली भूमि के लिए अलग मानक अपनाया जाएगा।
ऐसी भूमि के स्वामित्व कॉलम में “केंद्रीय सरकार” दर्ज किया जाएगा, जबकि खेती या उपयोग कॉलम में संबंधित केंद्रीय विभाग या एजेंसी का नाम लिखा जाएगा।
इस व्यवस्था से राज्य और केंद्र सरकार की भूमि के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देगा और रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा।
बोर्ड, निगम और संस्थाओं की भूमि का भी होगा स्पष्ट रिकॉर्ड
राज्य के विभिन्न बोर्डों और निगमों की भूमि के रिकॉर्ड को भी स्पष्ट और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत—
स्वामित्व कॉलम में संबंधित बोर्ड या निगम का नाम दर्ज होगा।
खेती या उपयोग कॉलम में भी उसी संस्था से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जाएगी।
इससे सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की भूमि के प्रबंधन में भी पारदर्शिता आएगी और भविष्य में होने वाले विवादों से बचाव होगा।
पंचायतों और स्थानीय निकायों की भूमि भी होगी चिन्हित
डॉ. मिश्रा ने बताया कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों की भूमि के रिकॉर्ड को भी स्पष्ट किया जाएगा।
ग्राम पंचायत की भूमि को पंचायत स्वामित्व के अंतर्गत दर्ज किया जाएगा।
पंचायत समिति और जिला परिषद की भूमि में उनके संस्थागत नाम स्पष्ट रूप से लिखे जाएंगे।
इसी प्रकार शहरी स्थानीय निकायों—जैसे नगर समितियां, नगर परिषदें और नगर निगम—की भूमि के स्वामित्व कॉलम में संबंधित निकाय का सटीक नाम दर्ज किया जाएगा।
इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वजनिक भूमि के रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेंगे।
नियमावली के अनुसार ही किए जाएंगे सभी सुधार
वित्तीय आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अभिलेखों में स्वामित्व संबंधी सभी सुधार हरियाणा भूमि अभिलेख नियमावली 2013 के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही किए जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यह प्रक्रिया नियमावली के अनुच्छेद 7.30 और 7.42 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप पूरी की जाएगी।
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेती से संबंधित कॉलम में निजी व्यक्तियों के नाम से दर्ज किसी भी प्रविष्टि को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं बदला जाएगा। इससे व्यक्तिगत भूमि अधिकारों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहेगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि एक समान नामकरण नीति लागू होने से भूमि अभिलेखों में स्पष्टता आएगी और सरकारी भूमि से संबंधित विवादों में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सटीक भूमि रिकॉर्ड न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि भूमि से जुड़े सभी रिकॉर्ड स्पष्ट, पारदर्शी और अद्यतन हों, ताकि सरकारी भूमि के प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या या विवाद की स्थिति से बचा जा सके।
इस पहल को भूमि प्रशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में सरकारी और सार्वजनिक भूमि के प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगा।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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