भाजपा, कांग्रेस और इनेलो के 87 विधायकों को वोट दिखाना होगा पार्टी के अधिकृत एजेंट को, नियमों के तहत होगा ओपन बैलट से मतदान
चंडीगढ़: हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इन सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके चलते 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव में भाजपा की ओर से Sanjay Bhatia, कांग्रेस की ओर से Karmveer Singh Bauddh और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में Satish Nandal चुनावी मैदान में हैं। तीन उम्मीदवारों के कारण चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के मैदान में आने से चुनाव का समीकरण बदला है। नांदल ने भले ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरा है, लेकिन वह वर्तमान में हरियाणा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। माना जा रहा है कि उन्हें तीन निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ भाजपा का परोक्ष समर्थन प्राप्त है।
कांग्रेस को सेंधमारी का डर, विधायकों को हिमाचल भेजा
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे नांदल कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने अधिकांश विधायकों को एहतियातन कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश भेज दिया है। पार्टी की योजना है कि मतदान से ठीक पहले ही सभी विधायकों को चंडीगढ़ वापस लाया जाए, ताकि किसी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके।
राज्यसभा चुनाव में पूरी तरह गुप्त नहीं होता मतदान
इस मामले पर संवैधानिक विशेषज्ञ और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट Hemant Kumar ने राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सामान्य चुनावों में प्रत्येक मतदाता को गुप्त मतदान का अधिकार होता है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में विधायकों को यह स्वतंत्रता पूरी तरह नहीं दी जाती।
हेमंत कुमार के अनुसार राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलट सिस्टम लागू होता है। इसका अर्थ यह है कि राजनीतिक दलों के टिकट पर चुने गए विधायकों को मतदान के बाद अपना बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है।
2003 में कानून में संशोधन के बाद लागू हुई व्यवस्था
उन्होंने बताया कि अगस्त 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान संसद ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन किया था। इस संशोधन के तहत राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलट की व्यवस्था लागू की गई।
इसके बाद फरवरी 2004 में केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने निर्वाचन संचालन नियमावली, 1961 में भी संशोधन कर इस व्यवस्था को लागू किया। इसका उद्देश्य क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार को रोकना था।
पार्टी एजेंट को वोट दिखाना अनिवार्य
नियमों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव से पहले हर राजनीतिक दल को फॉर्म 22ए के तहत अपने दो वरिष्ठ नेताओं या पदाधिकारियों को अधिकृत एजेंट के रूप में नियुक्त करना होता है। ये एजेंट मतदान केंद्र के भीतर मौजूद रहते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके दल के विधायक किस उम्मीदवार को वोट दे रहे हैं।
मतदान के दौरान विधायक पहले बैलेट पेपर पर अपनी पहली, दूसरी और तीसरी प्राथमिकता अंकित करते हैं। इसके बाद बैलेट बॉक्स में डालने से पहले उन्हें अपना भरा हुआ बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना पड़ता है।
यदि कोई विधायक अपने वोट को अधिकृत एजेंट को नहीं दिखाता या किसी अन्य व्यक्ति को दिखाता है तो उसका वोट अमान्य घोषित कर दिया जाता है, भले ही उसने बैलेट पेपर बॉक्स में डाल दिया हो।
हरियाणा विधानसभा के 87 विधायकों पर लागू होगा नियम
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 48, कांग्रेस के 37 और इनेलो के 2 विधायक शामिल हैं। इन 87 विधायकों को राज्यसभा चुनाव में मतदान के बाद अपना वोट अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होगा।
केवल निर्दलीय विधायक ही डाल सकेंगे गुप्त वोट
हालांकि इस नियम से तीन निर्दलीय विधायक बाहर हैं। वे अपना वोट बिना किसी को दिखाए सीधे बैलेट बॉक्स में डाल सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भाजपा के अधिकृत एजेंट को अपना वोट दिखाने की बाध्यता नहीं होगी।
इस प्रकार 16 मार्च को हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव में केवल तीन निर्दलीय विधायक ही पूरी तरह गुप्त मतदान कर सकेंगे, जबकि अन्य सभी दलों के विधायकों को ओपन बैलट व्यवस्था के तहत मतदान करना होगा।











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