अमृतसर में वेयरहाउसिंग अधिकारी की मौत के बाद बढ़ा विवाद, सीएम भगवंत मान ने स्वीकारा इस्तीफा; विपक्ष ने CBI जांच की उठाई मांग
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 21 मार्च 2026: पंजाब की राजनीति में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब राज्य के कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह पूरा मामला अमृतसर में पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद तूल पकड़ गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, रंधावा ने अपनी मौत से पहले एक वीडियो में कथित तौर पर एक मंत्री को जिम्मेदार ठहराया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में उन्होंने दावा किया कि वे दबाव और डर के कारण यह कदम उठा रहे हैं। वीडियो में लगाए गए आरोपों के चलते राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
मंत्री भुल्लर ने आरोपों को बताया झूठा
अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लालजीत सिंह भुल्लर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ये आरोप पूरी तरह “निराधार और बेबुनियाद” हैं।
भुल्लर ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा पारदर्शिता और सच्चाई के पक्ष में रही है और वे स्वयं भी निष्पक्ष जांच के समर्थक हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।
CM भगवंत मान बोले—दुर्भाग्यपूर्ण घटना
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया। उन्होंने मृतक अधिकारी के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
मान ने कहा कि एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह का कदम उठाना गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी कारण भुल्लर का इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को मामले की जांच के आदेश देते हुए अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भुल्लर के विभाग का अतिरिक्त प्रभार जल्द ही किसी अन्य मंत्री को सौंपा जाएगा।
विपक्ष हमलावर, FIR और CBI जांच की मांग
इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह गंभीर मामला है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी मंत्री की गिरफ्तारी की जाए और जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाए।
वहीं, शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक अधिकारी पर कथित तौर पर टेंडर से जुड़े मामलों में दबाव बनाया जा रहा था। मजीठिया ने कहा कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य, विशेषकर मोबाइल फोन, को सुरक्षित रखा जाना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस पूरे प्रकरण ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर सरकार जांच की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और तूल दे सकती हैं।











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