सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर उठाई चिंता, कई खर्चों पर जताया सवाल
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, मार्च 2026: वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में सरकारी विभागों द्वारा तेजी से बजट खर्च करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठने लगे हैं। सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने इस संबंध में जारी प्रेस वक्तव्य में कहा है कि मार्च के आते ही विभागों में “खर्च करने की होड़” शुरू हो जाती है, जो कई बार जनधन के दुरुपयोग की आशंका पैदा करती है।
एसोसिएशन के अनुसार, यह प्रवृत्ति अब एक तरह की “मार्च एंड स्पेंडिंग रेस” बन गई है, जिसमें विभाग अपनी उपलब्धि अधिक खर्च दिखाकर साबित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में कई बार ऐसे टेंडर और परियोजनाएं सामने आती हैं, जिनकी उपयोगिता और प्राथमिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
संदिग्ध खर्चों के उदाहरण
प्रेस वक्तव्य में कुछ हालिया प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए चिंता जताई गई है—
सेक्टर-26 पुलिस लाइन के एमटी सेक्शन में वाहनों को धूप से बचाने के लिए करीब ₹15 लाख की लागत से अस्थायी शेड का प्रस्ताव
जनरेटर के लिए लगभग ₹17 लाख की शेड योजना
हरियाणा विधानसभा में केवल टेपेस्ट्री रिस्टोरेशन पर ₹30 लाख खर्च करने की योजना
एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह के खर्च आम जनता के टैक्स के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं, खासकर तब जब देश का एक बड़ा वर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
“जनहित से ज्यादा आंकड़ों की होड़”
प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि वर्ष के अंतिम दिनों में जल्दबाजी में लिए गए फैसले कई बार वास्तविक जरूरतों के बजाय बजट समाप्त करने की मानसिकता से प्रेरित होते हैं। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता है, बल्कि विकास की प्राथमिकताएं भी पीछे छूट जाती हैं।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि—
बजट खर्च करने के बजाय उसकी प्रभावशीलता और प्राथमिकता पर ध्यान दिया जाए
मार्च महीने में होने वाले बड़े खर्चों की स्वतंत्र समीक्षा करवाई जाए
हर परियोजना को जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों पर परखा जाए
“सिर्फ आंकड़ों का खेल न बने विकास”
एसोसिएशन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो “मार्च स्पेंडिंग रेस” केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह जाएगी। इससे वास्तविक विकास और आम जनता की जरूरतें नजरअंदाज होती रहेंगी।
अंत में एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वित्तीय संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ किया जाए, ताकि हर खर्च का सीधा लाभ जनता तक पहुंचे और शासन में विश्वास कायम रहे।
दूसरा टेंडर देखे











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