गुरुग्राम/चंडीगढ़, 05 जनवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने गुरुग्राम स्थित एक आवासीय सोसायटी में गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने पाया कि एंड-स्टेज रीनल डिजीज से पीड़ित मरीज को, जो सप्ताह में तीन बार डायलिसिस पर निर्भर है, सोसायटी प्रबंधन द्वारा पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित किया गया।
शिकायतकर्ता जय प्रकाश, जीएलएस एवेन्यू, सेक्टर-92, गुरुग्राम के अनुसार, उनकी दोनों किडनियां क्षतिग्रस्त हैं और उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई होती है। कई बार उन्हें बेहोशी भी आई। उनका परिवार, जिसमें पत्नी (एक निजी स्कूल में अध्यापिका) और दो नाबालिग बेटियाँ हैं, सोसायटी में रहता है। बावजूद इसके, सोसायटी/बिल्डर स्टाफ ने उनकी गंभीर चिकित्सीय स्थिति को अनदेखा करते हुए उन्हें परिसर में वाहन पार्क करने की अनुमति नहीं दी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पार्किंग सुविधा केवल परिचित निवासियों या अवैध भुगतान करने वालों को दी जाती है।
आयोग के सदस्य (न्यायिक) श्री कुलदीप जैन ने कहा कि शिकायत के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि गंभीर रोगी को मानसिक उत्पीड़न, भेदभाव और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा। आयोग ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन बताया।
आयोग द्वारा जारी निर्देश:
गुरुग्राम के उपायुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
उपायुक्त को किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी के माध्यम से मामले की जांच कराने के आदेश दिए गए।
शिकायतकर्ता को तत्काल आवश्यक राहत सुनिश्चित की जाए।
पुलिस आयुक्त, गुरुग्राम को निर्देशित किया गया कि भविष्य में कोई उत्पीड़न या धमकी न हो।
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले यानी 11 फरवरी 2026 तक प्रस्तुत करनी होगी। आयोग ने दोहराया कि समाज के कमजोर और बीमार वर्ग के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना सभी संस्थाओं और प्रबंधन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।













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