चंडीगढ़, 27 मार्च 2026: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनाव में धांधली करने वाले निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएगी।
हुड्डा ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारी ने बीजेपी के साथ मिलकर साजिश रची और कांग्रेस के चार वोटों को रद्द कर दिया। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करे।
इनेलो पर निशाना साधते हुए हुड्डा ने कहा कि इस चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इंडियन नेशनल लोक दल कभी भी बीजेपी के खिलाफ नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि इनेलो ने वोट इसलिए नहीं डाला क्योंकि उसे पहले से ही कांग्रेस की जीत का अंदाजा था। हुड्डा के मुताबिक, वोट रद्द होने और क्रॉस वोटिंग के बावजूद कांग्रेस के पास 28 वोट थे, जबकि बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को केवल 16 वोट मिले।
ईंधन संकट और महंगाई के मुद्दे पर भी हुड्डा ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा टैक्स वसूला और अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और देशभर में एलपीजी की कमी पर भी सवाल उठाए।
हुड्डा ने कहा कि अगर सरकार दावा करती है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर लोगों को लंबी कतारों में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने हरियाणा में रसोई गैस की किल्लत के लिए भी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए हुड्डा ने कहा कि बीजेपी शासन में हालात बेहद खराब हो चुके हैं और हरियाणा देश के सबसे असुरक्षित राज्यों में शामिल हो गया है।
इसके अलावा, उन्होंने IDFC बैंक में हुए 590 करोड़ रुपये और पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन घोटालों के पीछे कौन जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि इन मामलों की गहन जांच कर दोषियों के नाम उजागर किए जाएं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
धान खरीद घोटाले को लेकर भी हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर शामिल लोगों को बचाया जा रहा है, जबकि छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।










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