August 29, 2026 4:28 am

August 29, 2026 4:28 am

हरियाणा में 1 अप्रैल से लागू कलेक्टर रेट पर उठा बड़ा कानूनी सवाल

एडवोकेट हेमंत कुमार ने सरकार को भेजा ज्ञापन, स्पष्ट प्रक्रिया और पारदर्शिता की उठाई मांग
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 31 मार्च 2026: हरियाणा में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रही नई कलेक्टर दरों (कलेक्टर रेट) को लेकर बड़ा कानूनी मुद्दा सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं प्रशासनिक- कानूनी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने राज्य में कलेक्टर रेट तय करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे स्पष्ट व पारदर्शी बनाने की मांग की है।
एडवोकेट हेमंत कुमार ने 30 मार्च को हरियाणा के राज्यपाल आशीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्व मंत्री विपुल गोयल, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) डॉ. सुमिता मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारियों, सभी मंडल आयुक्तों और 23 जिलों के उपायुक्तों को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है।

क्या है कलेक्टर रेट और क्यों है महत्वपूर्ण
कलेक्टर रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होता है, जिस पर किसी भी भूमि या संपत्ति की खरीद-फरोख्त या हस्तांतरण के समय स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क तय किया जाता है। यह दरें राज्य के राजस्व संग्रह और रियल एस्टेट बाजार की पारदर्शिता दोनों के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।

प्रक्रिया की कमी पर उठाए सवाल
ज्ञापन में हेमंत कुमार ने कहा है कि हरियाणा में हर वर्ष कलेक्टर रेट निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन इसके लिए हरियाणा स्टाम्प (अंडर-वैल्यूएशन की रोकथाम) नियम, 1978 के तहत कोई स्पष्ट और विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित नहीं है।
उनका कहना है कि बिना तय मापदंडों के दरें तय करने से पारदर्शिता की कमी बनी रहती है और इससे मनमाने फैसलों तथा विवादों की संभावना बढ़ जाती है।

पंजाब मॉडल का दिया उदाहरण
हेमंत कुमार ने पड़ोसी राज्य के पंजाब स्टाम्प (अंडर-वैल्यूड इंस्ट्रूमेंट्स का निपटारा) नियम, 1983 का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वर्ष 2002 से नियम 3A लागू है, जिसके तहत कलेक्टर रेट तय करने की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है।
इस प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाती है, जो भूमि की लोकेशन, उपयोग, सड़क से दूरी, निर्माण की स्थिति, सिंचाई सुविधा और फसल जैसे कई वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर दरों का निर्धारण करती है।

हरियाणा में पारदर्शिता की जरूरत
इसके विपरीत, हरियाणा में ऐसी कोई व्यवस्थित प्रणाली न होने के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में दरों के निर्धारण में एकरूपता की कमी देखी जाती है। इससे आम लोगों, खरीदारों और रियल एस्टेट से जुड़े लोगों को असमंजस का सामना करना पड़ता है।

नियमों में संशोधन की मांग
ज्ञापन में राज्य सरकार से मांग की गई है कि 1978 के नियमों में संशोधन कर पंजाब की तर्ज पर स्पष्ट प्रक्रिया जोड़ी जाए, ताकि कलेक्टर रेट का निर्धारण कानूनसम्मत, पारदर्शी और तर्कसंगत तरीके से हो सके।
हेमंत कुमार ने सरकार से इस मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान लेने, आवश्यक कदम उठाने और भेजे गए ज्ञापन की प्राप्ति की पुष्टि करने का भी अनुरोध किया है।

1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार द्वारा तय नई कलेक्टर दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होने जा रही हैं। ऐसे में इस मुद्दे का उठना आने वाले समय में नीति और कानूनी स्तर पर महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

4 0 0 0 8 2
Total Users : 400082
Total views : 645612

शहर चुनें