संजय अरोड़ा की दोबारा तैनाती पर चर्चा तेज, बिना इंटरव्यू चयन के आरोप; इंजीनियरिंग विंग में अंदरूनी नाराजगी
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 31 मार्च 2026: नगर निगम चंडीगढ़ में चीफ इंजीनियर पद पर संजय अरोड़ा की नियुक्ति के बाद विवाद और गहरा गया है। चंडीगढ़ प्रशासन के इस फैसले पर अब न सिर्फ प्रक्रिया बल्कि नियुक्ति के तरीके को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
छह माह की प्रक्रिया पर सवाल
जानकारी के अनुसार, इस पद के लिए पिछले करीब छह महीनों से प्रक्रिया चल रही थी, जिसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से एक दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम आए थे।
लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने किसी भी उम्मीदवार का इंटरव्यू नहीं लिया और अंत में अपने ही इंजीनियरिंग विंग से संजय अरोड़ा को नियुक्त कर दिया।
“पहले हटाया, फिर दोबारा लगाया” – उठे नए सवाल
स्थानीय लोगों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि करीब छह महीने पहले इसी पद से संजय अरोड़ा को हटाया गया था और अब दोबारा उन्हीं को उसी पद पर नियुक्त कर दिया गया है।
इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर छह महीने में ऐसा क्या बदल गया कि फिर से वही अधिकारी इस पद के लिए उपयुक्त माने गए?
क्या किसी आला अधिकारियों की नाराजगी दूर हो गई या पहले किसी स्तर पर रही कमी या “कमिटमेंट” अब पूरी हो गई—इसे लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
इंजीनियरिंग विंग में बढ़ी नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम से इंजीनियरिंग विंग में असंतोष बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि पिछले महिने एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी को इस पद पर नियुक्ति न मिलने से निराश होकर उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।
अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठता और अनुभव को नजरअंदाज किया गया, जिससे विभाग के भीतर मनोबल प्रभावित हुआ है।
पब्लिक हेल्थ विंग में भी विवाद
विवाद यहीं नहीं थमा। इंजीनियरिंग विंग के पब्लिक हेल्थ विभाग में भी एक वरिष्ठ स्थानीय इंजीनियर को नजरअंदाज कर पंजाब से एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर को डेपुटेशन पर लाया गया है।
इस फैसले को लेकर भी विभाग में अंदरूनी रोष देखने को मिल रहा है और कई इंजीनियर प्रशासन के शीर्ष स्तर के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी
इन सभी आरोपों और चर्चाओं के बीच प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
1 अप्रैल से संभालेंगे कार्यभार
गौरतलब है कि संजय अरोड़ा की नियुक्ति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और वे एक वर्ष या आवश्यकता अनुसार इस पद पर कार्य करेंगे।
आगे क्या?
अब देखना होगा कि इस विवाद के बीच प्रशासन पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का जवाब देता है या नहीं और इंजीनियरिंग विंग में बढ़ती नाराजगी को कैसे संभालता है।











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