अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के नाम पर गड़बड़ी, बिना काम भुगतान और नियमों की अनदेखी; जांच तेज, कई और खुलासों के संकेत
चंडीगढ़/पंचकूला, 4 अप्रैल 2026: हरियाणा में एक और बड़े वित्तीय घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। अक्षय ऊर्जा और सौर तकनीक को बढ़ावा देने वाली एजेंसी Chandigarh Renewable Energy and Science & Technology Promotion Society (CREST) में करीब 83 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सरकारी फंड का बड़ा हिस्सा नियमों को दरकिनार कर खर्च किया गया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, यह फंड राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं, उपकरणों की खरीद और इंस्टॉलेशन के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन आरोप है कि:
कई प्रोजेक्ट जमीन पर अस्तित्व में ही नहीं हैं,
फर्जी बिल और कागजी कार्यवाही के आधार पर भुगतान किया गया,
कुछ मामलों में बिना काम पूरा हुए ही पूरी राशि जारी कर दी गई।
इस घोटाले में सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से siphon करने की आशंका जताई जा रही है।
IFS अधिकारी की भूमिका संदिग्ध
मामले में एक वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि:
परियोजनाओं की स्वीकृति और फंड रिलीज में उनकी अहम भूमिका थी
कई फाइलों पर बिना उचित जांच के मंजूरी दी गई
विभागीय निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल रहा
जांच एजेंसियां अब इस अधिकारी की भूमिका की गहराई से जांच कर रही हैं।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
सूत्रों के मुताबिक, आंतरिक ऑडिट और कुछ शिकायतों के बाद इस मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि:
खर्च और प्रोजेक्ट प्रोग्रेस में भारी अंतर है
कई कंपनियों को संदिग्ध तरीके से ठेके दिए गए
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई
सरकार और जांच एजेंसियां सतर्क
मामला सामने आने के बाद:
उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं
विजिलेंस और अन्य एजेंसियां दस्तावेज खंगाल रही हैं
संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से पूछताछ शुरू हो चुकी है
सरकारी सूत्रों का कहना है कि “दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
हरियाणा में हाल के दिनों में वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं, जिससे सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। CREST घोटाला भी उसी कड़ी का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
आगे क्या?
जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन:
कई और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ सकती है
घोटाले की राशि 83 करोड़ से भी ज्यादा होने की आशंका है
जल्द ही एफआईआर दर्ज होने और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है
अक्षय ऊर्जा जैसे संवेदनशील और भविष्य से जुड़े क्षेत्र में इस तरह का घोटाला न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी झटका देता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष और तेज़ी से आगे बढ़ती है।











Total Users : 290982
Total views : 493101