June 5, 2026 4:32 am

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CHANDIGARH: सोफिया में अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगा पंजाब यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक का शोध

बुल्गारिया में आयोजित 24वीं ट्राइएनियल इंटरनेशनल फॉरेंसिक साइंसेज कॉन्फ्रेंस में डॉ. जेएस सेहरावत पेश करेंगे छह शोध पत्र

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 24 मई। Panjab University के मानव विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं चेयरपर्सन Dr. JS Sehrawat को बुल्गारिया की राजधानी Sofia में 25 से 30 मई 2026 तक आयोजित होने वाली 24वीं ट्राइएनियल इंटरनेशनल फॉरेंसिक साइंसेज कॉन्फ्रेंस में अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह सम्मेलन International Association of Forensic Sciences द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसे फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन माना जाता है।
डॉ. सेहरावत इस सम्मेलन में छह वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। उनके शोध का केंद्र बिंदु अजनाला कंकाल अवशेषों की पहचान में प्राचीन डीएनए, प्रोटिओमिक्स और स्टेबल आइसोटोप विश्लेषण जैसी आधुनिक फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजिकल तकनीकों का उपयोग है। उनके सम्मेलन में भाग लेने और शोध प्रस्तुत करने के लिए आंशिक आर्थिक सहयोग Council of Scientific and Industrial Research सहित अन्य एजेंसियों द्वारा प्रदान किया गया है।

डॉ. सेहरावत की फॉरेंसिक विज्ञान क्षेत्र में उपलब्धियों को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। फरवरी 2026 में American Academy of Forensic Sciences ने उन्हें फेलोशिप प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अलावा वे यूरोपियन कोऑपरेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (E-COST) के अंतर्गत आयोजित एमडीवीआई वर्किंग ग्रुप की बैठक में भी शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। वे पिछले कई वर्षों से अज्ञात मानव अवशेषों की क्रेनियोफेशियल पहचान से जुड़े डिजिटल एविडेंस समूह के सदस्य हैं।
अपने व्याख्यान में डॉ. सेहरावत बताएंगे कि अजनाला कंकाल अवशेषों की पहचान और प्रत्यावर्तन से प्राप्त वैज्ञानिक निष्कर्ष भारत में आपराधिक जांच के लिए फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी को कैसे नई दिशा दे सकते हैं। वे इस बात पर भी प्रकाश डालेंगे कि भारतीय संग्रहालयों, शोध प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में रखे हजारों अज्ञात कंकाल अवशेषों की वैज्ञानिक तरीकों से पहचान कर उन्हें उनके वंशजों या संबंधित समुदायों को सम्मानपूर्वक लौटाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मानवाधिकारों और नैतिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे में अज्ञात मानव अवशेषों की पहचान और उनके सम्मानजनक प्रत्यावर्तन के लिए वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील पद्धतियों को अपनाना समय की मांग है। भारत में अज्ञात कंकाल संग्रहों की जातीयता और भौगोलिक मूल का पता लगाना एक बड़ी चुनौती है।
अपने दूसरे शोध पत्र में वे सशस्त्र संघर्ष, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर चर्चा करेंगे। साथ ही अज्ञात व्यक्तियों की पहचान के लिए वैज्ञानिक डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता और उससे मानव पीड़ा कम करने में मिलने वाली मदद को भी रेखांकित करेंगे। सम्मेलन में वे अजनाला के व्यक्तियों की ऊंचाई का अनुमान उनके पैर की हड्डियों के मेट्रिक और सांख्यिकीय विश्लेषण के आधार पर किए गए अध्ययन को भी प्रस्तुत करेंगे।

डॉ. सेहरावत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा वाले इस सम्मेलन में छह शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। सम्मेलन में दुनिया भर के हजारों वैज्ञानिक और शोधकर्ता भाग लेंगे तथा नवीनतम शोध निष्कर्षों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दौरान वैश्विक विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ नए वैज्ञानिक सहयोग स्थापित होंगे, जिससे भविष्य में उनके शोध कार्यों को और मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि डॉ. सेहरावत इससे पहले इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, इटली और पुर्तगाल सहित कई देशों में अपने शोध प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके नाम फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में 125 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हैं। वर्तमान में वे अमृतसर के अजनाला स्थित एक प्राचीन कुएं से निकाले गए हजारों अज्ञात मानव अवशेषों और व्यक्तिगत वस्तुओं की फॉरेंसिक पहचान पर कार्य कर रहे हैं। यह परियोजना Science and Engineering Research Board और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तपोषित राष्ट्रीय ऐतिहासिक महत्व की परियोजना है।
डॉ. सेहरावत ने प्राचीन डीएनए, स्टेबल आइसोटोप विश्लेषण, प्रोटिओमिक्स, रेडियोकार्बन डेटिंग और मानव अस्थि ऊतकों की एलिमेंटल प्रोफाइलिंग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध प्रकाशित किए हैं। अजनाला कंकाल अवशेषों की पहचान के लिए वे कनाडा की Memorial University of Newfoundland, जर्मनी के Max Planck Institutes, अमेरिका की University of Oklahoma तथा California State University Chico जैसे संस्थानों के साथ भी सहयोग कर रहे

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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