बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़/पंचकूला,24 मई। हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने पंचकूला स्थित रेड बिशप में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अभय सिंह चौटाला के आरोपों पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप तथ्यहीन और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि अभय चौटाला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 1982, 1987 और 1991 में चौधरी देवीलाल की सरकार गिराने के लिए उन्होंने पैसे लिए थे, जबकि यह दावा पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में पहली बार वर्ष 1987 में सक्रिय हुए और उसी के बाद विधायक बने। ऐसे में 1982 में सरकार गिराने के आरोप का कोई आधार ही नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि अभय चौटाला पूर्व आईबी प्रमुख मलोय कृष्ण धर की पुस्तक “ओपन सीक्रेट” का हवाला दे रहे हैं, जबकि उस पुस्तक में कई तथ्यात्मक त्रुटियां हैं। रणजीत चौटाला ने कहा कि किताब में दावा किया गया है कि वर्ष 1987 में चौधरी देवीलाल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मुलाकात हुई थी, जबकि इंदिरा गांधी की हत्या वर्ष 1984 में ही हो चुकी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इंदिरा गांधी 1984 में नहीं रहीं तो 1987 में मुलाकात कैसे संभव हो सकती है।
रणजीत चौटाला ने कहा कि पुस्तक में लिफ्ट में मुलाकात और हरियाणा में चौधरी देवीलाल की जीत रोकने जैसी बातें लिखी गई हैं, जो पूरी तरह काल्पनिक हैं। उन्होंने कहा कि किताब में उनका, बनारसी दास गुप्ता और खुर्शीद अहमद का उल्लेख किया गया है, जबकि 1987 से पहले वे तीनों ही सदन के सदस्य नहीं थे।
उन्होंने कहा कि 1984 और 1987 में कोई विधायक नहीं बिका था। महम कांड के बाद बने राजनीतिक दबाव के चलते ओम प्रकाश चौटाला को इस्तीफा देना पड़ा था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने को कहा था, जिसके बाद बनारसी दास गुप्ता हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे।
रणजीत चौटाला ने बताया कि चार महीने बाद ओम प्रकाश चौटाला फिर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद हुकुम सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया और बाद में एक बार फिर ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री बने, लेकिन विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
उन्होंने 1982 के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल एक साथ थे। लोकदल के छह विधायक, जो चौधरी चरण सिंह गुट से जुड़े थे, चुनाव हार गए थे। रणजीत चौटाला ने दावा किया कि इन नेताओं को हरवाने में ओम प्रकाश चौटाला की भूमिका थी, जिसके कारण लोकदल बहुमत से दूर रह गया और कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला।
रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि देश के महत्वपूर्ण पदों पर रहे अधिकारियों को बिना तथ्य जांचे इस प्रकार की पुस्तकें नहीं लिखनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि अभय चौटाला द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं।













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