September 13, 2026 9:41 am

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HARYANA NEWS: RTI से खुलासा: हरियाणा राज्य सूचना आयोग पर 20 वर्षों में 113 करोड़ से अधिक खर्च, जागरूकता पर मात्र ढाई लाख रुपए

बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़। हरियाणा में 12 अक्टूबर 2005 से लागू सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून को 20 वर्ष पूरे होने के बीच राज्य सूचना आयोग के पिछले दो दशकों के खर्च और कार्यप्रणाली को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि पिछले 20 वर्षों में हरियाणा राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों और स्टाफ के वेतन-भत्तों पर कुल 113.42 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जबकि आरटीआई कानून के प्रति जनता को जागरूक करने पर केवल 2,49,936 रुपए ही खर्च किए गए।
पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के दौरान आरटीआई जागरूकता कार्यक्रमों पर एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया। उनका कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बने आरटीआई कानून को मजबूत करने की बजाय आयोग में प्रशासनिक खर्चों पर अधिक ध्यान दिया गया।

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नई बिल्डिंग पर 48 करोड़ खर्च
आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 से दिसंबर 2024 तक राज्य सूचना आयोग का कार्यालय चंडीगढ़ में किराये की इमारतों में संचालित होता रहा। इसके बाद 16 दिसंबर 2024 से आयोग का कार्यालय पंचकूला सेक्टर-3 स्थित नई चार मंजिला बिल्डिंग में स्थानांतरित किया गया।
इस भवन पर कुल 47.63 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जिसमें 9.30 करोड़ रुपए प्लॉट की कीमत तथा करीब 38.83 करोड़ रुपए भवन निर्माण पर खर्च हुए। इसके अलावा पिछले 16 महीनों में भवन का बिजली बिल 79.52 लाख रुपए तक पहुंच गया, जबकि फर्नीचर और साज-सज्जा पर 13.62 लाख रुपए खर्च किए गए।

बिना ओसी और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र के चल रहा भवन
पीपी कपूर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सूचना आयोग का नया चार मंजिला भवन पिछले करीब 18 महीनों से बिना ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) और बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के अनुसार ओसी लेना अनिवार्य है और इसके बिना किसी भवन का उपयोग गैरकानूनी माना जाता है।
उन्होंने मांग की कि बिना ओसी संचालित भवन को तुरंत सील किया जाए तथा आयोग में खाली पड़े सूचना आयुक्तों के पांच पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं।
20 वर्षों में 1.13 लाख से अधिक अपीलें
आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में आयोग को कुल 1,13,897 सेकेंड अपीलें और 12,629 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 1,08,288 अपील मामलों और 11,186 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। वर्तमान में 5,609 अपीलें और 1,443 शिकायतें लंबित हैं।

डिफॉल्टर अधिकारियों पर करोड़ों का जुर्माना
जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में डिफॉल्टर जन सूचना अधिकारियों पर 1.79 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से केवल 64.55 लाख रुपए ही वसूल किए जा सके। आयोग की वेबसाइट पर ऐसे 1,863 डिफॉल्टर जन सूचना अधिकारियों की सूची उपलब्ध है, जिनसे अब भी 2.94 करोड़ रुपए की जुर्माना राशि वसूल की जानी बाकी है।

आरटीआई एक्ट दम तोड़ रहा”
पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि सूचना आयोग की “सरकार परस्त कार्यशैली” के कारण प्रदेश में आरटीआई कानून कमजोर पड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश जन सूचना अधिकारी समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराते और आवेदकों को लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि जनता को जागरूक करने पर मात्र ढाई लाख रुपए खर्च करना और दूसरी ओर सूचना आयुक्तों व स्टाफ के वेतन-भत्तों पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होना इस बात का संकेत है कि आयोग “रिटायर्ड नौकरशाहों और सरकार के करीबी लोगों की आरामगाह” बनकर रह गया है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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