September 22, 2026 5:20 am

September 22, 2026 5:20 am

CHANDIGARH NEWS: मेयर के बयान से गरमाई राजनीति: क्या वाकई नगर निगम में अफसरशाही हावी है या कमजोर पड़ रहा है मेयर पद

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 5 मई। चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर सौरभ जोशी के एक बयान ने शहर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ऋषिकेश में आयोजित मेयर कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए उनके इस बयान—”मुझसे ज्यादा पावरफुल तो चपरासी है”—ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म दिया, बल्कि नगर निगम में मेयर पद की वास्तविक शक्तियों और उसकी गरिमा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बयान के बाद नगर निगम के मेयर कार्यालय में वर्षों से तैनात कर्मचारी राम आसरा अचानक सुर्खियों में आ गए। करीब डेढ़ दशक से मेयर कार्यालय में कार्यरत राम आसरा ने नगर निगम की राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनके सामने 15 से अधिक मेयर आए और गए, लेकिन वे कभी चर्चा का विषय नहीं बने। अब हालात ऐसे हैं कि लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने तक पहुंच रहे हैं।

एक बयान और शुरू हो गई बड़ी बहस
मेयर सौरभ जोशी की टिप्पणी को कुछ लोग नगर निगम में बढ़ती अफसरशाही पर कटाक्ष मान रहे हैं, जबकि कई पूर्व मेयर इसे मेयर पद की गरिमा के खिलाफ बता रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वास्तव में नगर निगम में जनप्रतिनिधियों की तुलना में प्रशासनिक अधिकारियों का दबदबा अधिक है, या फिर यह केवल व्यवस्था को लेकर उपजी निराशा का परिणाम है।

पूर्व मेयरों की राय में बंटा नजर आया मत
इस मुद्दे पर जब पूर्व मेयरों की राय सामने आई तो अधिकांश ने मेयर पद को सम्मानित और प्रभावशाली बताया। उनका कहना है कि शहर का प्रथम नागरिक होने के नाते मेयर की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि नगर निगम की नीतियों, विकास कार्यों और सदन की कार्यवाही में उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला का कहना है कि मेयर पद की अपनी गरिमा और प्रतिष्ठा होती है। इसकी तुलना किसी अन्य पद से करना उचित नहीं है। वहीं कुलदीप कुमार टीटा, अनूप गुप्ता, आशा जसवाल, रवि कांत शर्मा और राज बाला मलिक जैसे पूर्व मेयरों ने भी मेयर पद को सम्मानजनक और प्रभावशाली बताते हुए इसकी तुलना किसी कर्मचारी से किए जाने को अनुचित माना।

अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि का पुराना विवाद
हालांकि सभी पूर्व मेयर एक मत नहीं दिखे। वर्ष 2019 में मेयर रहे राजेश कुमार कालिया ने माना कि कई बार नगर निगम में वास्तविक शक्ति अफसरशाही के हाथों में अधिक दिखाई देती है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में मेयर के अधिकार सीमित नजर आते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभाव अधिक महसूस होता है।
इसी तरह कुछ पूर्व मेयरों ने यह भी माना कि नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिक अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है, ताकि वे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप बेहतर तरीके से काम कर सकें।

आखिर मेयर के पास कितनी शक्तियां?
पूर्व मेयर अरुण सूद ने इस बहस के बीच मेयर की संवैधानिक और प्रशासनिक भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि नगर निगम सदन की कार्यवाही का नेतृत्व मेयर करता है। किसी भी महत्वपूर्ण एजेंडे को सदन में लाने, बैठकों की अध्यक्षता करने और विकास संबंधी फैसलों में राजनीतिक सहमति बनाने में उसकी अहम भूमिका होती है।
उन्होंने बताया कि वित्त एवं अनुबंध समिति (एफ एंड सीसी) जैसी महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता भी मेयर ही करता है। इसके अलावा मेयर को निगम की फाइलें मंगवाने और विभिन्न मामलों में जानकारी लेने का अधिकार भी प्राप्त है। ऐसे में यह कहना कि मेयर पूरी तरह शक्तिहीन है, सही नहीं होगा।

राम आसरा बने चर्चा का केंद्र
इस पूरे विवाद के बीच सबसे अधिक चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है राम आसरा। वर्षों से मेयर कार्यालय में सेवाएं दे रहे राम आसरा अचानक शहर की राजनीतिक बहस का प्रतीक बन गए हैं। नगर निगम के गलियारों में अब लोग मजाकिया अंदाज में उन्हें “सबसे पावरफुल व्यक्ति” कहकर संबोधित कर रहे हैं।

असली सवाल: अधिकारों का या व्यवस्था का?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद किसी व्यक्ति विशेष या कर्मचारी से जुड़ा नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच शक्तियों के संतुलन की बहस को सामने लाता है। चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश में नगर निगम और प्रशासन के बीच अधिकारों का विभाजन लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।
मेयर सौरभ जोशी के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नगर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिक अधिकार मिलने चाहिए, या मौजूदा व्यवस्था ही शहर के प्रशासन के लिए उपयुक्त है। फिलहाल इतना तय है कि एक बयान ने नगर निगम की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

Our Visitor

4 1 7 8 8 2
Total Users : 417882
Total views : 669395

शहर चुनें