June 17, 2026 1:18 pm

June 17, 2026 1:18 pm

PANCHKULA NEWS: 1394 एकड़ अधिशेष भूमि पर सरकार का दावा मजबूत, आयुक्त अंबाला ने निजी मालिकाना म्यूटेशन किए रद्द

सात गांवों में फैली करीब 1394 एकड़ जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने के आदेश, दो माह में दोबारा सुनवाई पूरी करने के निर्देश

रमेश गोयत
पंचकूला। अंबाला मंडल के आयुक्त की अदालत ने दशकों से लंबित चले आ रहे एक बड़े भूमि विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए लगभग 1394 एकड़ अधिशेष (सरप्लस) भूमि को राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में मानने का आदेश दिया है। आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हरियाणा सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट, 1972 के तहत यह पूरी भूमि राज्य सरकार में निहित (वेस्ट) होती है, इसलिए निजी खरीदारों और अन्य निजी व्यक्तियों के नाम किए गए म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) को निरस्त किया जाता है।
यह मामला पंचकूला क्षेत्र के सात गांवों—बरवाला, जलौली, बीड़ बाबूपुर, बीड़ फिरोजारी, भराली, फतेहपुर वीरान और संगराना—में फैली विशाल कृषि भूमि से जुड़ा है, जिसकी कानूनी लड़ाई कई दशकों से विभिन्न प्रशासनिक और न्यायिक मंचों पर चल रही थी।

583 एकड़ पहले से सरकार के नाम, शेष 810 एकड़ पर था विवाद
आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत राजस्व रिकॉर्ड और तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार कुल भूमि लगभग 1394 एकड़ 1 कनाल 3 मरला दर्ज है। इसमें से करीब 583 एकड़ 3 कनाल 16 मरला भूमि पहले ही राज्य सरकार के नाम म्यूटेट हो चुकी थी, जबकि लगभग 810 एकड़ 5 कनाल 7 मरला भूमि विभिन्न निजी खरीदारों और निजी मालिकों के नाम दर्ज थी।
अदालत ने माना कि अधिशेष भूमि से संबंधित कानूनी स्थिति को देखते हुए यह शेष भूमि भी राज्य सरकार के नाम दर्ज की जानी चाहिए। इसी आधार पर निजी स्वामित्व के पक्ष में हुए म्यूटेशन रद्द करने के आदेश जारी किए गए।

कानून लागू होने की तिथि के आधार पर होगा आकलन
अपने विस्तृत आदेश में आयुक्त ने कहा कि अधिशेष भूमि का निर्धारण उस समय लागू कानून और निर्धारित संदर्भ तिथि के आधार पर किया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि संबंधित बड़े भूस्वामी की कुल भूमि जोत को एक इकाई मानकर ही अधिशेष भूमि की गणना की जानी चाहिए।
फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि भूमि स्वामी का निधन वर्ष 1960 में हो चुका था, जबकि भूमि संबंधी कानून पहले से लागू था। इसलिए अधिशेष भूमि के निर्धारण में बाद के निजी हस्तांतरणों या दावों को प्राथमिक आधार नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट के निर्देशों का भी हुआ उल्लेख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह तर्क रखा गया कि अधिशेष भूमि संबंधी कार्यवाही अभी भी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित है और इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
आयुक्त ने अपने आदेश में हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों और निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले का समयबद्ध निस्तारण आवश्यक है। अदालत ने माना कि मामले में देरी के कारण विवाद और जटिल होता गया, इसलिए अब इसे अंतिम रूप देने की जरूरत है।

निजी खरीदारों और वारिसों को मिलेगा सुनवाई का अवसर
हालांकि आयुक्त ने भूमि को सरकार के नाम दर्ज किए जाने संबंधी कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन पूरे विवाद के अंतिम निस्तारण के लिए मामले को कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला के पास वापस भेज दिया गया है।

कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि वे:
सभी निजी खरीदारों को सुनवाई का अवसर दें।
कानूनी वारिसों के दावों पर विचार करें।तीसरे पक्ष के दावों की जांच करें।
सभी संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण करें।
कानून और न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप नया निर्णय लें।

दो महीने में फैसला करने का सख्त निर्देश
आयुक्त अंबाला ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला इस पूरे मामले की पुनः सुनवाई कर दो माह के भीतर निर्णय लें। अदालत ने कहा कि मामला पहले ही काफी समय से लंबित है, इसलिए अब इसमें और देरी नहीं होनी चाहिए।

क्षेत्र में पड़ेगा बड़ा असर
करीब 1394 एकड़ भूमि से जुड़े इस फैसले को हरियाणा के सबसे बड़े अधिशेष भूमि विवादों में से एक माना जा रहा है। यदि अंतिम स्तर पर भी सरकारी दावा बरकरार रहता है तो इससे करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर स्वामित्व का प्रश्न सुलझ सकता है। वहीं निजी खरीदारों और अन्य दावेदारों की ओर से आगे कानूनी विकल्प अपनाने की संभावना भी बनी हुई है।

प्रमुख बिंदु
1394 एकड़ अधिशेष भूमि विवाद में आयुक्त अंबाला का बड़ा फैसला।
810 एकड़ से अधिक भूमि पर निजी मालिकाना म्यूटेशन रद्द।
पूरी भूमि को राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में माना गया।
मामला पुनः कलेक्टर एग्रेरियन, पंचकूला को भेजा गया।
सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के निर्देश।
दो माह के भीतर नया फैसला सुनाने का आदेश।
सात गांवों की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि विवाद के केंद्र में।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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