June 10, 2026 12:27 pm

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CHANDIGARH NEWS: ना CLU, ना माली हट की परमिशन! धड़ल्ले से चल रहा कालोनियों व फार्म हाउस का खेल!

एग्रीकल्चर जमीन पर धड़ल्ले से बन रहे फार्म हाउस, कट रही अवैध कॉलोनियां

जिनके जिम्मे अवैध निर्माण रोकना, क्या वही चला रहे हैं पूरा खेल?

सरकारी गाड़ी, बड़ा रसूख, लग्जरी लाइफस्टाइल

शहर के बाहरी एरिया में कट रही कालोनियों की जांच की मांग

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 9 जून। चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि पर अवैध निर्माण का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहां नियमों के अनुसार कृषि भूमि पर निर्माण और कॉलोनाइजेशन के लिए विभिन्न विभागों से अनुमति आवश्यक होती है, वहीं कई स्थानों पर बिना सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) और बिना माली हट की वैध अनुमति के फार्म हाउस बनाए जा रहे हैं तथा अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग और उससे जुड़े तंत्र में एक संगठित गिरोह सक्रिय बताया जा रहा है। आरोप है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के जिम्मे अवैध निर्माण और कॉलोनियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी है, वही सरकारी तंत्र के भीतर रहकर पूरे खेल को संचालित कर रहे हैं।

नोटिस का डर, फिर सेटिंग का खेल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध निर्माण करने वालों को पहले विभागीय कार्रवाई, सीलिंग और तोड़फोड़ का डर दिखाया जाता है। कई मामलों में सुबह अवैध निर्माण गिराने का नोटिस जारी होता है और शाम तक मामला सेट होने की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। इसके बाद निर्माण कार्य पहले की तरह चलता रहता है।
लोगों का आरोप है कि नोटिस अब कार्रवाई का माध्यम कम और दबाव बनाने का जरिया ज्यादा बनते जा रहे हैं। इसी कारण अवैध कॉलोनियां और फार्म हाउसों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

अधिकारियों की मिलीभगत पर  कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार इस कथित नेटवर्क में अधिकारियों की मिलीभगत से विभिन्न सरकारी विभागों के ग्रुप-सी और ग्रुप-डी श्रेणी के कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ कच्चे कर्मचारी भी होने की चर्चा है। आरोप यह भी है कि इन कर्मचारियों के पास बकायदा सरकारी गाड़ियां उपलब्ध रहती हैं और वे विभागीय प्रभाव का उपयोग करते हुए जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं।
चर्चा यह भी है कि इन कर्मचारियों की जीवनशैली को देखकर आम व्यक्ति यह अंदाजा तक नहीं लगा सकता कि वे निचले स्तर के कर्मचारी हैं। शहर में आने वाले टॉप मॉडल के मोबाइल फोन, लग्जरी रहन-सहन और प्रभावशाली नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

होटल और बार में विशेष आवभगत?
सूत्रों का दावा है कि शहर के कई होटल और बार संचालक भी ऐसे कर्मचारियों को विशेष महत्व देते हैं। कारण यह बताया जाता है कि विभागीय नोटिस और निरीक्षण का डर हमेशा बना रहता है। इसी वजह से कई स्थानों पर उन्हें विशेष सुविधाएं मिलने की चर्चाएं आम हैं।

गिरोह के सामने आला अधिकारी भी बेबस?
विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस नेटवर्क का प्रभाव इतना मजबूत है कि कई वरिष्ठ अधिकारी भी खुलकर कार्रवाई करने से बचते हैं। शिकायतों के बावजूद कई मामलों में फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और कार्रवाई कागजों तक सीमित रह जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग वास्तव में सख्ती बरतें तो कृषि भूमि पर हो रहे अधिकांश अवैध निर्माणों पर तत्काल रोक लग सकती है। लेकिन जिस तेजी से फार्म हाउस और कॉलोनियां विकसित हो रही हैं, उससे सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजनीतिक संरक्षण या मोटी डील?
अवैध निर्माणों और कॉलोनियों के इस बढ़ते नेटवर्क को लेकर राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर हो रहे निर्माणों की जानकारी विभागों को नहीं है या फिर किसी मोटी डील के चलते कार्रवाई नहीं हो रही।
भूमि कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

जांच की मांग तेज
सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण, फार्म हाउसों और कॉलोनियों की व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि कहीं विभागीय कर्मचारी या अन्य प्रभावशाली लोग नियमों की अनदेखी कर इस पूरे खेल को संरक्षण तो नहीं दे रहे।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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