भर्ती घोटाले, अवैध नियुक्तियां, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग
चंडीगढ़ निवासी नवजोत लेहल ने विजिलेंस जांचों का हवाला देकर उठाए गंभीर सवाल, कहा— वर्षों से कार्रवाई के अभाव में बढ़ा भ्रष्टाचार
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सहकारिता विभाग (रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटीज-आरसीएस) और चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में कथित भ्रष्टाचार, अवैध भर्तियों, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। चंडीगढ़ निवासी नवजोत लेहल ने विभिन्न विजिलेंस जांच रिपोर्टों और विभागीय दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि सहकारिता विभाग में वर्षों से नियमों की अनदेखी कर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
लेहल ने कहा कि उनके द्वारा एकत्रित दस्तावेजों और विजिलेंस जांचों के तथ्यों से स्पष्ट होता है कि विभाग में कई मामलों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन अब तक दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है।
समाप्त हो चुके पदों पर की गईं नियुक्तियां, सरकारी खजाने पर बोझ का आरोप
नवजोत लेहल के अनुसार वर्ष 2026 की विजिलेंस रेगुलर इंक्वायरी नंबर-4 में आरसीएस कार्यालय में वर्ष 2021 से 2023 के बीच की गई भर्ती प्रक्रिया की जांच की जा रही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इंस्पेक्टर ग्रेड-2 के आठ ऐसे पदों पर नियुक्तियां कर दी गईं जिन्हें भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत वर्षों पहले समाप्त माना जा चुका था।
लाहली का कहना है कि इन पदों को पुनर्जीवित करने या भर्ती की अनुमति देने संबंधी कोई सक्षम आदेश मौजूद नहीं था। इसके बावजूद नियुक्तियां कर दी गईं और नियुक्त कर्मचारियों को वेतन एवं अन्य लाभ दिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि इससे सरकारी राजस्व को लगातार नुकसान हो रहा है।
वेतन और पेंशन लाभों में कथित अनियमितता
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग के कुछ अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से कुछ कर्मचारियों को नियमों से परे जाकर 100 प्रतिशत वेतन और पेंशन संबंधी लाभ उपलब्ध करवाए। रवनीत लाहली का कहना है कि यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बनता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की वित्तीय और प्रशासनिक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सरकारी आवास के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों पर सवाल
लेहल ने आरोप लगाया कि विभाग से जुड़े एक कर्मचारी ने सरकारी आवास पर नियमों के विपरीत कब्जा बनाए रखा। इतना ही नहीं, सरकारी धन का उपयोग आवास के नवीनीकरण, मरम्मत और अतिरिक्त निर्माण कार्यों में किया गया।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी संसाधनों का इस प्रकार व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया जाना प्रशासनिक नियमों और वित्तीय अनुशासन के विपरीत है।
भर्ती प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखने का आरोप
नवजोत लेहल ने एक अन्य विजिलेंस जांच का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा और पात्रता संबंधी नियमों में कथित रूप से अनुचित छूट दी गई। शिकायत के अनुसार इससे योग्य उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हुए और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी एक उम्मीदवार को विशेष लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया हो तो यह पूरे चयन तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले भी जांच के दायरे में
लहल का दावा है कि विभाग के एक अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने संबंधी मामले की भी जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है ताकि जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप
नवजोत लेहल ने चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े पुराने मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि बैंक में भर्ती अनियमितताओं, फंड ट्रांसफर और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर पहले भी गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं।
उनके अनुसार पूर्व जांच अधिकारियों ने इन मामलों में आपराधिक कार्रवाई और विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी। इतना ही नहीं, कुछ दस्तावेजों में कथित तौर पर मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की अनुशंसा का भी उल्लेख मिलता है।
लेहल का कहना है कि यदि पूर्व में जांच अधिकारियों द्वारा गंभीर टिप्पणियां की गई थीं तो उन पर आगे क्या कार्रवाई हुई, यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
सहकारिता सप्ताह कार्यक्रम पर भी उठाए सवाल
नवजोत लेहल ने हाल ही में आयोजित सहकारिता सप्ताह कार्यक्रम को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कार्यक्रम में सहकारी समितियों के सभी सदस्यों को समान अवसर नहीं दिया गया और केवल चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन का उद्देश्य सभी सदस्यों को साथ लेकर चलना है, लेकिन यदि कार्यक्रमों का संचालन सीमित समूहों तक सिमट जाए तो इससे सहकारी व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित होती है।
‘सिस्टम में बैठे लोगों के संरक्षण से बढ़ रहा भ्रष्टाचार’
लाहली ने आरोप लगाया कि विभाग में कई मामलों में कार्रवाई न होने के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है। उनका कहना है कि जब शिकायतों और जांच रिपोर्टों के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते तो गलत संदेश जाता है और जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर पड़ती है।
उन्होंने मांग की कि सहकारिता विभाग, आरसीएस कार्यालय और चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े सभी विवादित मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकार और जांच एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग
नवजोत लेहल ने केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, चंडीगढ़ प्रशासन, विजिलेंस विभाग और अन्य सक्षम एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी मामलों की व्यापक जांच कराई जाए तो वर्षों से लंबित शिकायतों और आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी।
उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग जनता और सहकारी संस्थाओं के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त होना आवश्यक है।













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