June 15, 2026 2:11 pm

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CHANDIGARH NEWS: DC, ADC, RCS व तहसील ऑफिस में ट्रांसफर पॉलिसी पर सवाल, संवेदनशील शाखाओं में वर्षों से जमे कर्मचारियों को लेकर उठी बहस

विजिलेंस के तीन साल वाले नियम पर अमल नहीं होने के आरोप, कई कर्मचारी एक दशक से अधिक समय से एक ही शाखा में तैनात

सेटिंग से मलाईदार सीटों पर लग रहे बार- बार

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 13 जून: यूटी प्रशासन के डिप्टी कमिश्नर (डीसी), एडीसी, आरसीएस व तहसील ऑफिस व अन्य कार्यालय में ट्रांसफर पॉलिसी और कर्मचारियों के रोटेशन सिस्टम को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विजिलेंस विभाग द्वारा संवेदनशील सीटों पर अधिकतम तीन वर्ष की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा, जिसके चलते कई कर्मचारी वर्षों से एक ही शाखा और सीट पर कार्यरत हैं।
सूत्रों के अनुसार डीसी कार्यालय की कई महत्वपूर्ण शाखाओं में कर्मचारी 5 से 20 वर्षों तक लगातार तैनात रहे हैं। इनमें राजस्व शाखा, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, विवाह पंजीकरण शाखा, स्थापना शाखा, डायरी शाखा और डीसी स्टाफ जैसी अहम शाखाएं शामिल हैं। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि ट्रांसफर के आदेश जारी होने के बावजूद कई कर्मचारियों को कुछ समय बाद फिर उसी शाखा में वापस नियुक्त कर दिया जाता है।

पब्लिक डीलिंग कार्यालय होने के बावजूद नहीं हो रहा नियमित रोटेशन
डीसी, एडीसी, एसडीएम, आरसीएस, बिल्डिंग ब्रांच, तहसील कार्यालय शहर का सबसे महत्वपूर्ण पब्लिक डीलिंग कार्यालय माना जाता है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामलों, रजिस्ट्री, विवाह पंजीकरण और विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यालयों में कर्मचारियों का नियमित रोटेशन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होता है। लेकिन डीसी कार्यालय में कई कर्मचारियों की लंबे समय से एक ही शाखा में तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विजिलेंस के निर्देश क्या कहते हैं?
विजिलेंस विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि संवेदनशील और जनसंपर्क वाली सीटों पर कर्मचारियों की तैनाती सीमित अवधि के लिए होनी चाहिए। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के प्रभाव, पक्षपात या संभावित भ्रष्टाचार की आशंका को कम करना है।

निर्देशों के प्रमुख बिंदु:
संवेदनशील सीटों पर अधिकतम तीन वर्ष की तैनाती।
नियमित अंतराल पर शाखा परिवर्तन।
पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा।
सार्वजनिक शिकायतों और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करना।

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लंबे समय से एक ही शाखा में तैनाती के आरोप
सूत्रों और कर्मचारियों के बीच चर्चा के अनुसार डीसी कार्यालय की विभिन्न शाखाओं में कई कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत हैं। इनमें शामिल नामों को लेकर दावा किया जा रहा है कि:
महाबीर (सीनियर असिस्टेंट) – 20 वर्ष से अधिक समय से एक ही शाखा में।
जितेंद्र (क्लर्क) – लगभग 12-13 वर्ष से एडीसी स्टाफ में।
ज्योति (डीसी पीए स्टाफ) – करीब 15 वर्ष से डीसी स्टाफ में।
सतीश शर्मा – लगभग 7-8 वर्ष से डीसी पीए शाखा में।
विनोद कुमार (रीडर) – करीब 8-10 वर्ष से एक ही व्यवस्था में।
कुलदीप (एमटीएस) – लंबे समय से एक ही सीट पर।
विकास मणि – लगभग 15 वर्ष से तहसील राजस्व शाखा में।
अजीत – करीब 5 वर्ष से राजस्व शाखा में।
अभिनंदन – लगभग 5 वर्ष से राजस्व शाखा में।
जतिंदर – करीब 6 वर्ष से सब-रजिस्ट्रार शाखा में।

रुचि – करीब 8 वर्ष से मैरिज ब्रांच में।
सिमरन – लगभग 5 वर्ष से स्थापना शाखा में।
पायल गुरु – करीब 4 वर्ष से डायरी शाखा में।
भानु – करीब 8 वर्ष से एसडीएम ईस्ट कार्यालय में।

 SDM (S) नेहा जूनेजा क्लर्क आउटसोर्स 5 साल से P A sdm (S)

गीता सीनियर असिस्टेंट स्टैबलिश ब्रांच (E A Branch) डीसी ऑफिस लगभग 15 साल एक ही साका में
सुरेश वर्मा डिस्पैच राइडर MA ब्रांच 10 साल से

डीसी का पूरा पर्सनल स्टाफ 5 साल से ज्यादा टाइम से एक ही जगह पर है
एडीसी का पूरा पर्सनल स्टाफ एक ही जगह पर 5 साल से ज्यादा समय पर
इसके अलावा तहसील कार्यालय और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में कार्यरत कई आउटसोर्स कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भी 8 से 10 वर्षों से एक ही शाखा में कार्यरत होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

इंटर-डिपार्टमेंट ट्रांसफर और कॉमन कैडर नीति पर भी सवाल
यूटी प्रशासन ने कुछ वर्ष पहले विभिन्न विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने और कर्मचारियों की लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती को रोकने के लिए इंटर-डिपार्टमेंट ट्रांसफर और कॉमन कैडर पॉलिसी लागू करने की दिशा में पहल की थी। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि इन नीतियों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा।
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछले कई वर्षों से ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिसके कारण अनेक शाखाओं में वही कर्मचारी लगातार कार्यरत बने हुए हैं।

आउटसोर्स कर्मचारियों को अहम जिम्मेदारियां दिए जाने पर भी चर्चा
डीसी कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई महत्वपूर्ण शाखाओं और सीटों पर आउटसोर्स स्टाफ को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि नियमित कर्मचारी उन्हीं पर निर्भर रहते हैं। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है।

प्रशासन से उठ रहे अहम सवाल
क्या संवेदनशील सीटों पर तीन वर्ष की सीमा का पालन किया जा रहा है?
वर्षों से एक ही शाखा में कार्यरत कर्मचारियों की समीक्षा कब होगी?
क्या डीसी कार्यालय में व्यापक स्तर पर रोटेशन नीति लागू की जाएगी?
आउटसोर्स कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की क्या नीति है?
क्या इंटर-डिपार्टमेंट ट्रांसफर और कॉमन कैडर नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा?
पारदर्शिता के लिए रोटेशन जरूरी
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यालय में नियमित ट्रांसफर और रोटेशन व्यवस्था सुशासन की बुनियाद होती है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है बल्कि कार्यप्रणाली में निष्पक्षता भी बनी रहती है। ऐसे में डीसी कार्यालय में वर्षों से एक ही शाखा में कार्यरत कर्मचारियों को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन का रुख आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

4 महीने में 4 बार पत्र, फिर भी नहीं मिली पूरी जानकारी; विजिलेंस ने मांगी संवेदनशील पदों पर जमे कर्मचारियों की रिपोर्ट

चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में संवेदनशील और गैर-संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे कर्मचारियों को लेकर विजिलेंस विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने पिछले चार महीनों के दौरान चार बार पत्र जारी कर विभिन्न विभागों से ऐसे कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांगा है जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही सीट पर कार्यरत हैं।
जानकारी के अनुसार विजिलेंस ने 15 अप्रैल, 17 अप्रैल और 5 मई को विभागों को पत्र भेजकर रोटेशन पॉलिसी के तहत जानकारी मांगी थी। इसके बाद 28 मई तक रिपोर्ट भेजने की समय-सीमा निर्धारित की गई, लेकिन कई विभागों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अब “मोस्ट अर्जेंट” श्रेणी में रिमाइंडर जारी कर तत्काल रिपोर्ट तलब की गई है।
विजिलेंस द्वारा भेजे गए प्रोफार्मा में विभागों से चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। इनमें एक ही सीट पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, पिछले तीन वर्षों में किए गए ट्रांसफर, वर्तमान में अब भी एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों की संख्या तथा उनके ट्रांसफर न होने के कारण शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार प्रशासन अब ऐसी रोटेशन पॉलिसी पर काम कर रहा है, जिसके तहत संवेदनशील पदों पर तीन वर्ष पूरे होने के बाद कर्मचारियों का स्थानांतरण स्वतः सुनिश्चित किया जा सके। माना जा रहा है कि विभागों से रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

विजिलेंस के 4 सवाल
• 3 साल या उससे अधिक समय से एक ही सीट पर कितने कर्मचारी हैं?
• पिछले 3 वर्षों में कितनों का ट्रांसफर किया गया?
• वर्तमान में कितने कर्मचारी अब भी उसी सीट पर हैं?
• जिनका ट्रांसफर नहीं हुआ, उसके पीछे क्या कारण हैं?

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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