June 13, 2026 2:17 pm

June 13, 2026 2:17 pm

भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ता अविश्वास

 डॉ. सत्यवान सौरभ

भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की कूटनीति में विशेष महत्व रखते हैं। वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के समय भारत ने जिस प्रकार राजनीतिक, सैन्य और मानवीय सहयोग प्रदान किया, उसने दोनों देशों के बीच मैत्री और विश्वास की मजबूत नींव रखी। पिछले पाँच दशकों में व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा, संपर्क, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भारत की “पड़ोसी प्रथम” नीति तथा बांग्लादेश की विकासोन्मुख विदेश नीति ने भी संबंधों को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। इसके बावजूद हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव और अविश्वास के संकेत दिखाई दिए हैं। यह स्थिति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध केवल रणनीतिक हितों से संचालित नहीं होते, बल्कि उनमें संवेदनशीलताओं, जनभावनाओं और पारस्परिक सम्मान का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है।

भारत और बांग्लादेश लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, जो भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी स्थलीय सीमा है। दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक संबंध मौजूद हैं। पिछले एक दशक में भूमि सीमा समझौता, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी सहयोग, ऊर्जा व्यापार तथा क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। बांग्लादेश आज भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को मुख्य भूमि से जोड़ने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और समृद्धि के लिए आवश्यक है।

हाल के समय में बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में हुए बदलावों ने द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित किया है। सत्ता परिवर्तन, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण भारत की भूमिका को लेकर अलग-अलग धारणाएँ विकसित हुई हैं। बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक समूहों में यह धारणा बनी कि भारत किसी विशेष राजनीतिक शक्ति के प्रति अधिक सहानुभूति रखता है, जबकि भारत अपनी ओर से स्थिरता और विकास को प्राथमिकता देने की बात करता रहा है। इस प्रकार की धारणाएँ चाहे तथ्यात्मक रूप से सही हों या नहीं, वे विश्वास के वातावरण को प्रभावित करती हैं और संबंधों में मनोवैज्ञानिक दूरी उत्पन्न करती हैं।

तीस्ता नदी के जल बँटवारे का मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के बीच एक प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। बांग्लादेश के लिए तीस्ता नदी का जल कृषि और आजीविका की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई वर्षों से प्रस्तावित समझौता विभिन्न कारणों से लंबित है, जिससे बांग्लादेश में यह भावना विकसित हुई है कि उसकी चिंताओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही। भारत की संघीय व्यवस्था में राज्यों की भूमिका भी इस विषय को जटिल बनाती है, लेकिन समाधान में देरी ने अविश्वास को बढ़ावा दिया है। जल संसाधनों के न्यायसंगत और टिकाऊ प्रबंधन के बिना दीर्घकालिक विश्वास निर्माण कठिन प्रतीत होता है।

सीमा संबंधी मुद्दे भी संबंधों में तनाव का कारण बने हैं। तस्करी, अवैध आव्रजन और सीमा सुरक्षा की चुनौतियों के कारण कई बार सीमा पर अप्रिय घटनाएँ हुई हैं। नागरिक हताहतों की घटनाओं ने बांग्लादेश में व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है और भारत की छवि पर भी प्रभाव डाला है। यद्यपि दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियाँ समन्वय बढ़ाने के प्रयास कर रही हैं, फिर भी ऐसी घटनाएँ आम लोगों के मन में नकारात्मक भावनाएँ पैदा करती हैं। पड़ोसी देशों के बीच सीमा केवल सुरक्षा का विषय नहीं होती, बल्कि मानवीय और सामाजिक संबंधों से भी जुड़ी होती है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसे मुद्दों ने भी बांग्लादेश में कुछ आशंकाएँ उत्पन्न कीं। यद्यपि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया कि ये उसकी आंतरिक नीतियाँ हैं, फिर भी बांग्लादेश में यह चिंता व्यक्त की गई कि इनका अप्रत्यक्ष प्रभाव भविष्य में दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नीतियों की वास्तविकता के साथ-साथ उनकी सार्वजनिक धारणा भी महत्वपूर्ण होती है और यही कारण है कि ऐसे मुद्दे कभी-कभी कूटनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं।

दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती सक्रियता भी भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। बांग्लादेश ने अपनी विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए चीन सहित कई देशों के साथ आर्थिक और अवसंरचनात्मक सहयोग बढ़ाया है। भारत के लिए यह स्वाभाविक चिंता का विषय है कि क्षेत्र में किसी बाहरी शक्ति का अत्यधिक प्रभाव उसके रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखते हुए विभिन्न देशों से निवेश और तकनीकी सहयोग प्राप्त करना चाहता है। इस स्थिति में दोनों देशों के लिए पारदर्शिता और संवाद अत्यंत आवश्यक हो जाते हैं।

व्यापारिक असंतुलन भी अविश्वास के कारकों में शामिल है। यद्यपि द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसका लाभ अपेक्षाकृत अधिक भारत को मिलता हुआ दिखाई देता है। बांग्लादेश लंबे समय से भारतीय बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुँच तथा गैर-शुल्क बाधाओं में कमी की मांग करता रहा है। आर्थिक संबंधों में असंतुलन की भावना यदि लंबे समय तक बनी रहे तो वह राजनीतिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए आर्थिक साझेदारी को अधिक संतुलित और समावेशी बनाना समय की आवश्यकता है।

सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों ने भी संबंधों को प्रभावित किया है। आज गलत सूचनाएँ, भ्रामक प्रचार और राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काने वाली सामग्री बहुत तेजी से फैलती है। कई बार छोटी घटनाएँ भी डिजिटल मंचों पर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की जाती हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच गलतफहमियाँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे वातावरण में सरकारों और मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे तथ्यपरक संवाद को बढ़ावा दें और दुष्प्रचार पर प्रभावी नियंत्रण रखें।

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने रणनीतिक हितों और पड़ोसी देशों की संवेदनशीलताओं के बीच संतुलन स्थापित करे। एक बड़ी क्षेत्रीय शक्ति होने के कारण भारत की नीतियों का प्रभाव उसके पड़ोसियों पर स्वाभाविक रूप से पड़ता है। इसलिए केवल राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं है; पड़ोसी देशों की आशंकाओं और अपेक्षाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है। इसी प्रकार बांग्लादेश को भी यह समझना होगा कि भारत की सुरक्षा चिंताएँ, विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित प्रश्न, उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों को एक-दूसरे की वैध चिंताओं का सम्मान करना होगा।

विश्वास बहाली के लिए सबसे पहले लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में ठोस पहल आवश्यक है। तीस्ता जल समझौते को प्राथमिकता देकर दोनों देश एक सकारात्मक संदेश दे सकते हैं। सीमा प्रबंधन में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना, संयुक्त गश्त और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना भी आवश्यक है। व्यापारिक असंतुलन को कम करने के लिए बांग्लादेशी उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक अवसर दिए जा सकते हैं। ऊर्जा, परिवहन और संपर्क परियोजनाओं को गति देकर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक परस्पर निर्भर बनाया जा सकता है।

उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद को नियमित और संस्थागत स्वरूप देना भी आवश्यक है। जब देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच निरंतर संवाद बना रहता है, तब गलतफहमियों की संभावना कम हो जाती है। साथ ही शिक्षा, संस्कृति, खेल, मीडिया और पर्यटन के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना चाहिए। सरकारों के बीच विश्वास जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण नागरिकों के बीच विश्वास भी है। सांस्कृतिक निकटता दोनों देशों की सबसे बड़ी शक्ति है और इसे संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सकता है।

क्षेत्रीय मंचों जैसे बिंस्टेक् और बीबिन के माध्यम से सहयोग को बढ़ावा देना भी उपयोगी होगा। साझा आर्थिक और रणनीतिक हितों पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग अविश्वास को कम करने में सहायक हो सकता है। जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास दोनों देशों को और निकट ला सकते हैं।

अंततः भारत और बांग्लादेश के संबंध केवल दो देशों के बीच की साझेदारी नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, भाषा, भूगोल और साझा संघर्षों से निर्मित एक विशेष संबंध हैं। हाल के वर्षों में उत्पन्न तनाव और अविश्वास यह अवश्य दर्शाते हैं कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में संवेदनशीलताओं और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। संवाद, सहयोग, पारस्परिक सम्मान और साझा विकास की भावना के आधार पर दोनों देश वर्तमान चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। यदि भारत और बांग्लादेश विश्वास की नई नींव पर अपने संबंधों का पुनर्निर्माण करते हैं, तो न केवल द्विपक्षीय संबंध अधिक मजबूत होंगे, बल्कि दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि का मार्ग भी अधिक प्रशस्त होगा।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

virender chahal

Our Visitor

3 4 2 1 3 1
Total Users : 342131
Total views : 566682

शहर चुनें