June 15, 2026 3:56 pm

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CHANDIGARH: बारिश सिर पर, तब जागा इंजीनियरिंग विभाग! AC ऑफिस से निकले चीफ इंजीनियर, जलभराव रोकने के दावों पर उठे सवाल

हर साल डूबती सड़कें, घंटों जाम और परेशान जनता, फिर भी समय रहते नहीं जागता सिस्टम

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 13 जून। मानसून की पहली तेज बारिश से पहले चंडीगढ़ प्रशासन और इंजीनियरिंग विभाग एक बार फिर हरकत में आ गया है। शनिवार को मुख्य अभियंता अपने अधीनस्थ अधिकारियों की पूरी फौज के साथ शहर में मानसून तैयारियों का जायजा लेने निकले, लेकिन इस निरीक्षण ने तैयारियों से ज्यादा प्रशासनिक लापरवाही और वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर बहस छेड़ दी है।
शहरवासियों का कहना है कि पूरे साल वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर फाइलों में विकास कार्यों के दावे करने वाले अधिकारी बारिश का मौसम आते ही सड़कों पर उतरकर निरीक्षण का दिखावा करते हैं। सवाल यह है कि यदि रोड गलियों, ड्रेनेज लाइनों और नालों की सफाई पूरे वर्ष नियमित रूप से होती रहती, तो हर साल बारिश में शहर की हालत क्यों बिगड़ती?

सुखना चो का डर फिर सता रहा, हर साल दोहराई जाती है वही कहानी

चंडीगढ़ में मानसून का नाम आते ही लोगों को सबसे पहले सुखना चो और उससे जुड़े पुलों की चिंता सताने लगती है। बीते वर्षों में कई बार भारी बारिश के दौरान सुखना चो में जलस्तर इतना बढ़ा कि पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा। नतीजा यह हुआ कि शहर के प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया और हजारों लोग घंटों फंसे रहे।
इस बार भी हालात अलग नहीं दिख रहे। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गाद निकासी और ड्रेनेज नेटवर्क की सफाई पूरी नहीं हुई तो पहली ही भारी बारिश में प्रशासन के दावे पानी में बह जाएंगे।

रोड गलियां बंद, रेन वाटर लाइनें चोक, लेकिन दावों की कमी नहीं

शहर के कई सेक्टरों में रोड गलियां महीनों से मिट्टी, प्लास्टिक और कचरे से अटी पड़ी हैं। कई इलाकों में रेन वाटर लाइनें चोक हैं और पानी की निकासी की व्यवस्था बेहद कमजोर बनी हुई है। स्थानीय निवासी आरोप लगा रहे हैं कि विभागीय अधिकारी केवल निरीक्षण और बैठकों तक सीमित रहते हैं जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं।
लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले करोड़ों रुपये सफाई और डी-सिल्टिंग पर खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही सच्चाई सामने आ जाती है।

निरीक्षण में क्या-क्या देखा गया

मुख्य अभियंता ने अधीक्षण अभियंताओं और कार्यकारी अभियंताओं के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान रोड गलियों की सफाई, सड़कों की स्थिति, पेड़ों की छंटाई और पटियाला-की-राव में चल रहे डी-सिल्टिंग कार्यों का निरीक्षण किया गया।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मानसून शुरू होने से पहले अधिकतम गाद निकासी का कार्य पूरा किया जाए ताकि वर्षा जल की निकासी सुचारू बनी रहे और जलभराव वाले क्षेत्रों में समस्या कम हो सके।
मुख्य अभियंता ने फील्ड स्टाफ को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी रोड गलियां गाद, कचरे और अन्य अवरोधों से मुक्त रखी जाएं तथा सफाई कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

जनता पूछ रही: बारिश से पहले ही क्यों याद आती हैं तैयारियां?

शहर के सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन हर वर्ष मानसून से ठीक पहले निरीक्षण अभियान चलाता है, लेकिन मानसून समाप्त होने के बाद अगले कई महीनों तक ड्रेनेज सिस्टम की सुध नहीं ली जाती। इसी कारण हर साल वही समस्याएं दोबारा सामने आती हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि पूरे वर्ष वैज्ञानिक तरीके से ड्रेनेज सिस्टम का रखरखाव किया जाए, रोड गलियों की नियमित सफाई हो और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जाए तो जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

हॉस्टल परियोजनाओं का भी किया निरीक्षण

मानसून तैयारियों की समीक्षा के साथ मुख्य अभियंता ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पीईसी) के कुरुक्षेत्र हॉस्टल और सेक्टर-46 स्थित सरकारी कॉलेज के हॉस्टल ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित एजेंसियों को समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

पहली बारिश ही खोलेगी तैयारियों की पोल

फिलहाल इंजीनियरिंग विभाग दावा कर रहा है कि मानसून को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। लेकिन शहरवासियों का कहना है कि असली परीक्षा कागजों पर नहीं, बल्कि पहली तेज बारिश में होगी। यदि सड़कें फिर पानी में डूबती हैं, सुखना चो के पुलों पर खतरा बढ़ता है और शहर जाम में फंसता है, तो विभाग के सभी दावे सवालों के घेरे में आ जाएंगे।
अब देखना यह होगा कि इस बार प्रशासन की तैयारियां वास्तव में शहर को राहत दिलाती हैं या फिर हर साल की तरह मानसून चंडीगढ़ की व्यवस्थाओं की कमजोरियों को उजागर कर देता है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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