चंडीगढ़, 8 जनवरी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेलों के क्षेत्र में हरियाणा के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का नाम दुनिया भर में रोशन करने वाले हरियाणा को भाजपा की केंद्र सरकार जानबूझकर बेहद कम बजट देती है। वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार हरियाणा के हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाने के बजाय मूकदर्शक बनी हुई है।
हुड्डा ने उत्तराखंड में संपन्न हुए राष्ट्रीय खेलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रति पदक खर्च के हिसाब से हरियाणा में मात्र 4.5 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि महाराष्ट्र में 43.50 लाख, मध्य प्रदेश और दिल्ली में 1.13 करोड़, बिहार में 1.69 करोड़, उत्तर प्रदेश में 7.85 करोड़ और गुजरात में 11.21 करोड़ रुपये प्रति पदक खर्च किए गए। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि हरियाणा में खेलों पर किया गया निवेश हमेशा बेहतर नतीजे देता है, इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया योजना के करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के बजट में भी हरियाणा को केवल 80 करोड़ रुपये ही दिए गए। हुड्डा ने कहा कि भारत की कुल आबादी का महज 2 प्रतिशत होने के बावजूद हरियाणा देश के अंतरराष्ट्रीय पदकों में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान देता है। ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे हर मंच पर हरियाणा के खिलाड़ी वर्षों से तिरंगा ऊंचा करते आए हैं।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ऐसे में कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हरियाणा की भागीदारी और प्रतिनिधित्व पूरी तरह स्वाभाविक और न्यायसंगत है। यदि इन खेलों के कुछ आयोजन हरियाणा में होते हैं तो इससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलेगा और खेल-इकोसिस्टम मजबूत होगा। साथ ही उन्नत स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और आधुनिक खेल अवसंरचना का विकास भी होगा।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हरियाणा में 481 खेल स्टेडियम बनाए गए और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के दो सेंटर स्थापित किए गए। लेकिन भाजपा सरकार ने इन स्टेडियमों के रखरखाव तक के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया। खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति को भी भाजपा सरकार ने खत्म कर दिया।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने स्कूल स्तर पर पहली कक्षा से ही खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए SPAT नीति लागू की थी, जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया। इस नीति के तहत अनुसूचित जाति समाज की बेटियों को जिला और राज्य स्तर तक पहुंचने पर 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी, जिसे भी बंद कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान 750 खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गईं, जबकि भाजपा सरकार ने अब तक किसी खिलाड़ी को नियुक्ति नहीं दी। खिलाड़ियों को प्रमोशन से वंचित किया गया और वर्ष 2021 के बाद से कैश अवार्ड भी बंद कर दिए गए। इतना ही नहीं, ग्रामीण स्तर पर आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिताओं को भी भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया, जो खिलाड़ियों के भविष्य के लिए बेहद नुकसानदायक है।











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